इन 4 सेक्टर्स में दिख रहा निवेश का मौका, AI के साथ-साथ चलेंगे पारंपरिक सेक्टर: रमेश दमानी

दिग्गज निवेशक रमेश दमानी (Ramesh Damani) ने कहा है कि ग्लोबल मार्केट्स में इस समय सबसे अधिक फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े थीम्स पर है। हालांकि घरेलू बाजार में डिफेंस, मेटल्स, माइनिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर्स निवेशकों के शानदार मौके पेश कर सकते हैं। उनका मानना है कि बाजार में सेक्टोरल रोटेशन का दौर चल रहा है

अपडेटेड Feb 27, 2026 पर 1:27 PM
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रमेश दमानी (Ramesh Damani) का कहना है कि AI, मौजूदा सिस्टम को पूरी तरह बदल नहीं देगा

दिग्गज निवेशक रमेश दमानी (Ramesh Damani) ने कहा है कि ग्लोबल मार्केट्स में इस समय सबसे अधिक फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े थीम्स पर है। हालांकि घरेलू बाजार में डिफेंस, मेटल्स, माइनिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर्स निवेशकों के शानदार मौके पेश कर सकते हैं। उनका मानना है कि बाजार में सेक्टोरल रोटेशन का दौर चल रहा है और पारंपरिक इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में भी मजबूत संभावनाएं उभर रही हैं।

दमानी ने 'राइजिंग भारत समिट 2026' में कहा कि ग्लोबल स्तर पर दो बड़े ट्रेंड स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। पहला, कई देश अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए देश में ही मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। जबकि अभी तक वे केवल अमेरिका की अगुआई वाली ग्लोबल सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर थे। दूसरा, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से प्रयास हो रहे हैं, जिसमें माइनिंग, मेटल उत्पादन, सोर्सिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करना शामिल है।

उनके अनुसार, इन बदलावाों का सीधा लाभ उन सेक्टरों को मिल सकता है जोफिजिकल कैपेबिलिटी और घरेलू प्रोडक्शन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जिन निवेशकों को लगता है कि मार्केट अच्छा परफॉर्म नहीं कर रहे हैं, वे शायद गलत एरिया में मौके देख रहे हो। दमानी ने कहा कि मेटल्स, फार्मा और डिफेंस सेक्टर में हाल के समय में अच्छी तेजी देखने को मिली है।


AI पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम करेंगे। उनका मानना है कि AI मौजूदा सिस्टम को पूरी तरह बदल नहीं देगा, बल्कि उनके साथ मिलकर काम करेगा।

इतिहास में पहले हुए टेक्नोलॉजी बदलावों को देखते हुए, दमानी ने कहा कि इनोवेशन के साथ-साथ मार्केट भी ऐतिहासिक रूप से बढ़े हैं। उन्होंने 1980 के दशक के बीच में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के कंप्यूटराइजेशन की ओर बढ़ने को एक उदाहरण के तौर पर बताया कि कैसे टेक्नोलॉजी अपनाने से समय के साथ मार्केट का आकार और कामकाज का तरीका बदला।

उनका कहना है शेयर मार्केट का रिटर्न सीधी लाइन में चलने के बजाय साइकिल में चलता है, और अभी का माहौल सेक्टर में बदलाव के दौर को दिखाता है। उन्होंने कहा कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और स्ट्रेटेजिक क्षमताओं से जुड़े सेक्टर में मौके मिल सकते हैं, भले ही AI ग्लोबल मार्केट की कहानी को आकार दे रहा हो।

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