IRFC Q3 results : सरकारी कंपनी इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRFC) ने सोमवार, 19 जनवरी को जानकारी दी है कि उसने फाइनेंशियल ईयर के पहले नौ महीनों में ही 60,000 करोड़ रुपए के पूरे साल के सैंक्शन गाइडेंस को हासिल कर लिया है। IRFC ने यह जानकारी अपने दिसंबर तिमाही के नतीजों के साथ दी है। इस अवधि में कपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले 10.5% बढ़कर 1,802 करोड़ रुपए पर रहा है, जो कंपनी के मुताबिक कंपनी का अब तक का सबसे ज़्यादा तिमाही मुनाफा है।
हालांकि, इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के 6,763 करोड़ रुपए से 1.5% कम होकर 6,661 करोड़ रुपए पर रहा है। कंपनी की टॉपलाइन में यह गिरावट रेल मंत्रालय द्वारा एक प्रोजेक्ट लीज एग्रीमेंट पर लगाई गई रोक को एक साल बढ़ाने के कारण हुई, जिसका असर इस अवधि में रेवेन्यू पर पड़ा है।
IRFC के CMD मनोज कुमार दुबे ने कहा "कंपनी का इस साल का 30,000 करोड़ रुपए के डिस्बर्समेंट का टारगेट सही ट्रैक पर है और Q3 के आखिर तक लगभग तीन-चौथाई रकम पहले ही बांटी जा चुकी है।"
रेलवे से नया बिजनेस न मिलने के बावजूद, तिमाही के आखिर में मैनेज किए जा रहे एसेट्स बढ़कर रिकॉर्ड 4.75 लाख करोड़ रुपए पर रहे हैं। कंपनी ने अपना "ज़ीरो NPA" स्टेटस भी बनाए रखा है।
मनोज दुबे ने आगे कहा, "IRFC को उम्मीद है कि मॉरेटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद, ज़्यादा मार्जिन वाली डाइवर्सिफाइड लेंडिंग और इंडियन रेलवे के साथ नए प्रोजेक्ट एग्रीमेंट का पॉजिटिव असर अगले फाइनेंशियल ईयर से ज़्यादा साफ़ दिखाई देगा।"
IRFC के CMD ने आगे कहा कि कंपनी मल्टीलेटरल एजेंसियों के साथ को-फाइनेंसिंग के मौके तलाश रही है, रेल से जुड़े प्रोजेक्ट्स की रीफाइनेंसिंग कर रही है और मेट्रो रेल, रिन्यूएबल एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और पोर्ट्स जैसे सेक्टर्स में विस्तार पर फोकस कर रही है।
IRFC के शेयर आज 1.29 रुपए यानी 1.06 फीसदी की कमजोरी के साथ 120.90 रुपए पर बंद हुए हैं। आज की इसका दिन का हाई 155.52 रुपए और दिन का लो 119.75 रुपए है। यह स्टॉक लिस्टिंग के बाद के अपने 229 रुपए के पीक से लगभग 50 फीसदी नीचे दिख रहा है। यह उन स्टॉक्स की लिस्ट में भी शामिल है जिनका फ्री फ्लोट कम है,क्योंकि सरकार अभी भी कंपनी में 86% हिस्सेदारी रखती है जो 75% की मिनिमम शेयरहोल्डिंग लिमिट से ज़्यादा है।