Get App

IRFC Shares: ₹200 के ऊपर भी थी तगड़ी डिमांड, अब ₹100 के नीचे नहीं मिल रहे खरीदार! आखिर क्या है चक्कर

IRFC Share Price: एक समय ऐसा था कि IRFC जैसे रेलवे स्टॉक्स की चमक पर खुदरा निवेशक ताबड़तोड़ पैसा लगा रहे थे। ₹200 के पार जाने पर भी इसकी मांग मजबूत बनी थी लेकिन अब ₹100 के नीचे इस पर ऐसा दबाव बना है कि संभल ही ना पा रहा। फिलहाल रिकॉर्ड हाई से यह 61% नीचे है। जानिए क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या इस पर दबाव बना रहने वाला है। यहां इसकी पूरी एनालिसिस दी जा रही है कि शेयरों पर दबाव क्यों है और इसके लिए अहम ट्रिगर प्वाइंट क्या है

Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Aug 09, 2026 पर 3:15 PM
IRFC Shares: ₹200 के ऊपर भी थी तगड़ी डिमांड, अब ₹100 के नीचे नहीं मिल रहे खरीदार! आखिर क्या है चक्कर
IRFC के लिए सबसे अहम ट्रिगर प्वाइंट फिलहाल ये है कि इसकी एसेट क्वालिटी बहुत ही अच्छी है। इसका एनपीए जीरो है।

IRFC Share Price: निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराने वाली पब्लिक सेक्टर की दिग्गज कंपनी आईआरएफसी के शेयर इस समय बिकवाली के भारी दबाव से जूझ रहे हैं। फिलहाल यह टूटकर एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर के आस-पास है जोकि रिकॉर्ड हाई से 61% से अधिक नीचे है। यह स्थिति तो तब है, जब कंपनी ने रिकॉर्ड कारोबारी नतीजे पेश किए। जून 2026 तिमाही में इसका टोटल इनकम, नेटवर्थ और शुद्ध मुनाफा रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया तो एनपीए जीरो हो गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आईआरएफसी के शेयरों की गिरावट खरीदारी का मौका है या इस पर दबाव बना रहने वाला है। यहां इसकी पूरी एनालिसिस दी जा रही है कि शेयरों पर दबाव क्यों है और इसके लिए अहम ट्रिगर प्वाइंट क्या है।

IRFC Shares: दो वजहों से शेयर दबाव में

लेडिंग बुक की थमती रफ्तार: जून 2026 तिमाही के आखिरी में आईआरएफसी का AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) ₹4.79 ट्रिलियन यानी लाख करोड़ था जबकि मार्च 2026 के आखिरी में यह ₹4.85 ट्रिलियन था। इसके अलावा जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ऑपरेशंस से आईआरएफसी का रेवेन्यू 19.46% बढ़कर ₹8261.11 करोड़ हो गया लेकिन इसी रेवेन्यू का एक अहम हिस्सा यानी ब्याज से कमाई 23.36% घटकर ₹1,147.56 करोड़ पर आ गई। कंपनी के रेवेन्यू को लीज इनकम से सपोर्ट मिला था जोकि इस दौरान 31.29% चढ़कर ₹7094.47 करोड़ पर पहुंच गया। जून 2026 तिमाही में कंपनी का नेट इंटेरेस्ट मार्जिन (NIM) सालाना आधार पर 1.53% से 1.48% पर आ गया। ऐसे लेंडर के लिए जिसका पूरा बिजनेस लेडिंग पर है, उसके लिए लोन बुक का घटना और मार्जिन का कम होना सबसे अहम बातें हैं। हालांकि मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष 2027 के आखिरी तक NIM के 1.6% से अधिक होने और 2030 तक 2% तक का टारगेट रखा है।

सरकार की घटती हिस्सेदारी: आईआरएफसी के शेयरों पर एक और अहम दबाव इस बात को लेकर है कि जून 2026 तिमाही के आखिरी में सरकार की हिस्सेदारी इसमें 82.9% थी। जून में ऑफर फॉर सेल के जरिए सरकार ने अपनी कुछ हिस्सेदारी हल्की की थी। चूंकि बाजार के नियमों के मुताबिक किसी लिस्टेड कंपनी में कम से कम 25% पब्लिक शेयरहोल्डिंग अनिवार्य है तो ऐसे में अभी सरकार की हिस्सेदारी बेचने की गुंजाइश अभी भी है। ऐसे में मार्केट में ओवरसप्लाई की आशंका इसके शेयरों पर दबाव बनाए हुए है। साल 2021 में लिस्टिंग से पहले सरकार की होल्डिंग इसमें 100% थी, और आईपीओ लाने के बाद सरकार की हिस्सेदारी 86.36% रह गई थी।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें