IT शेयरों को लगा झटका! Infosys, Wipro, TCS समेत कई शेयर 2% तक लुढ़के, जानिए वजह

IT Stocks: भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में आज 21 मार्च को गिरावट देखी गई। इसके साथ ही इन शेयरों लगातार तीन दिनों से जारी बढ़त का सिलसिला आज थम गया। इस गिरावट के पीछे ग्लोबल आईटी कंपनी एक्सेंचर (Accenture) के कमजोर रेवेन्यू ग्रोथ अनुमानों को मुख्य वजह बताया जा रहा है। एक्सेंचजर दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है

अपडेटेड Mar 21, 2025 पर 12:18 PM
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IT Stocks: एक्सेंचर ने वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में नई बुकिंग में 3% की गिरावट दर्ज की

IT Stocks: भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में आज 21 मार्च को गिरावट देखी गई। इसके साथ ही इन शेयरों लगातार तीन दिनों से जारी बढ़त का सिलसिला आज थम गया। इस गिरावट के पीछे ग्लोबल आईटी कंपनी एक्सेंचर (Accenture) के कमजोर रेवेन्यू ग्रोथ अनुमानों को मुख्य वजह बताया जा रहा है। एक्सेंचजर दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। इसे भारतीय IT कंपनियों के लिए भी एक बेंचमार्क माना जाता है क्योंकि इसके अनुमान आईटी सेक्टर के संभावित प्रदर्शन का एक तरह से संकेत देते हैं।

Accenture के आईटी नतीजे ग्लोबल IT इंडस्ट्री के माहौल को लेकर अहम संकेत देती, खासकर उन भारतीय IT कंपनियों के लिए जो एक्सपोर्ट आधारित सर्विस बिजनेस पर निर्भर हैं। एक्सेंचर ने जून तिमाही को लेकर अपने अनुमानों में कटौती की है, जिसके बाद इशके शेयर NASDAQ पर 7% तक गिर गए। इस नेगेटिव सेंटीमेंट का असर भारतीय IT कंपनियों पर भी दिखा।

एक्सेंचर की रिपोर्ट के बाद इंफोसिस और विप्रो के अमेरिकी डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs) में 3% से अधिक गिरावट आई। भारतीय बाजारों में भी IT स्टॉक्स में कमजोरी देखी गई। सुबह 9:20 बजे, Nifty IT इंडेक्स 2% से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था


इंफोसिस (Infosys), एचसीएल टेक (HCL Tech), विप्रो (Wipro) और टीसीएस (TCS) जैसे दिग्गज IT शेयर 1.5 फीसदी से लेकर 2.5% के बीच लुढ़क गए।

एक्सेंचर ने बताया कि वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में नई बुकिंग में 3% की गिरावट दर्ज की गई, जो कुल 20.9 अरब डॉलर रही। इसमें से कंसल्टिंग बुकिंग 10.47 अरब डॉलर थी, जबकि मैनेज्ड सर्विसेज बुकिंग 10.44 अरब डॉलर थी। Accenture ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) के लिए सालाना रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 5-7% के बीच रखा, जो इसके पिछले 4-7% के अनुमान से थोड़ा बेहतर था।

हालांकि, कंपनी ने हाल के हफ्तों में बढ़ती अनिश्चितता की बात कही, खासकर अमेरिका के पब्लिक सेक्टर में जहां ट्रंप सरकार की खर्च कटौती योजनाओं से दबाव बढ़ा है। DOGE (डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियंसी) की ओर से की गई समीक्षा और बजट कटौती भी इस गिरावट का कारण बनी।

एनालिस्ट्स की राय

हालांकि ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA का कहना है कि भारतीय IT कंपनियों पर अमेरिकी सरकार के खर्च में कटौती का सीधा असर नहीं पड़ेगा। उसने TCS, Infosys, Wipro और Tech Mahindra को "आउटपरफॉर्म" रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने कहा कि उसे BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस) और CMT (कम्युनिकेशन, मीडिया और टेक्नोलॉजी) वर्टिकल्स में सुधार जारी रहने की उम्मीद है।

वहीं Citi ने भारतीय IT सेक्टर को लेकर सतर्क नजरिया अपनाया है। ब्रोकरेज ने कहा कि रुपये में गिरावट से भले ही फायदा हो, लेकिन मुनाफे की मार्जिन सुधारने में दिक्कतें बनी रहेंगी। उसने लार्ज-कैप स्टॉक्स में HCL Tech और Infosys को और मिडकैप सेगमेंट में Mphasis को पसंद किया।

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