Jane Street vs Sebi: सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने मार्केट रेगुलेटर SEBI को निर्देश दिया है कि वह तीन हफ्तों के भीतर यह स्पष्ट करे कि आखिर क्यों उसने एल्गो ट्रेडिंग फर्म 'जेन स्ट्रीट (Jane Street) को मांगे गए सभी डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 18 नवंबर 2025 को होगी। जेन स्ट्रीट, एक अमेरिकी एल्गो ट्रेडिंग फर्म हैं।
इसने SEBI के 3 जुलाई 2025 के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसने जेन स्ट्रीट के भारतीय शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने पर रोक लगा दी थी। जेन स्ट्रीट ने दलील दी कि रेगुलेटर ने जिन दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की, उनमें से कई उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए।
SEBI का आरोप है कि Jane Street अपनी ट्रेडिंग रणनीति उजागर करने से बच रही है और इसके बजाय रेगुलेटर से आंतरिक प्रशासनिक सर्कुलर मांग रही है, जिसका सीधे मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
दूसरी ओर, Jane Street का कहना है कि अगर SEBI उसके साथ NSE की रिपोर्ट्स साझा कर सकता है, जो उसके खुद के दस्तावेज भी नहीं हैं, तो फिर वह अपने उन दस्तावेजों को क्यों नहीं शेयर कर सकता है, जिसके आधार पर उसने कार्रवाई की है। जेन स्ट्रीट ने सेबी से लगभग 61 दस्तावेज मांगे थे।
SEBI ने जवाब में कहा कि उसने केवल वही दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं जो मामले से संबंधित हैं और वह अभी भी अंतिम आदेश पारित करने की प्रक्रिया में है।
SAT ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद SEBI को निर्देश दिया कि वह तीन हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करे। इसके बाद Jane Street एक और हफ्ते में रिप्लाई दाखिल करने का मौका मिलेगा।
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