अब लोग जिम क्रेमर की बातों को गंभीरता से ले रहे हैं। दरअसल, इस पूर्व हेज फंड मैनेजर ने कुछ दिन पहले ही मार्केट में बड़ी गिरावट आने का अनुमान जताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि मार्केट में आने वाली गिरावट 1987 के 'ब्लैक मंडे' जैसी हो सकती है। 7 अप्रैल को ठीक वेसा ही हुआ। भारत सहित दुनिया भर के स्टॉक्स मार्केट्स ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर गिरने लगे। हालांकि, सुबह में 5 फीसदी तक गिरने वाला इंडियन मार्केट शाम में 4 फीसदी से कम गिरावट के साथ बंद हुआ। लेकिन, प्रमुख एशियाई बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।
क्रेमर ने बताया संकट कितना बड़ा है
Jim Cramer ने अब मंदी (Recession) का अनुमान जताया है। इसका मतलब है कि आगे मुश्किल बढ़ने जा रही है। तो क्या कोविड के असर से धराशाई होने वाली ग्लोबल इकोनॉमी एक बार फिर से गंभीर संकट में फंसने जा रही है? क्या फिर से स्टॉक मार्केट्स में निवेशकों का सबकुछ डूब जाएगा? अगर क्रेमर की मानें तो इस बार ऐसा होने नहीं जा रहा है। बिजनेस चैनल CNBC से बातचीत में क्रेमर ने मंदी और उसके संभावित असर के बारे में विस्तार से बताया।
निवेशकों को डरने की जरूरत नहीं
पूर्व हेज फंड मैनेजर ने सबसे पहले तो निवेशकों का डर दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इनवेस्टर्स को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो टैरिफ लगाया है, वह अमेरिकी इकोनॉमी के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। लेकिन, दूसरे 'ग्रेट डिप्रेशन' की आंशका नहीं दिख रही है। इसकी वजह यह है कि अभी भी संस्थाएं मजबूत स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा नहीं लगता कि पूरा इकोनॉमिक सिस्टम खतरे में है।
दुनिया संकट से बाहर आने में कामयाब रहेगी
क्रेमर ने कहा, "इस बात की आशंका नहीं दिखती की बड़े बैंक धराशायी हो जाएंगे। दरअसल ऐसा कोई नहीं चाहता। लेकिन, ट्रंप के गलत प्लान की वजह से हम मंदी की तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन, हम इससे पहले नहीं तो दूसरे तरीके से बाहर निकलने में कामयाब हो जाएंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप सिर्फ एक पल में स्टॉक मार्केट्स में निराशा को खुशियों में बदल सकते हैं। समस्या के समाधान के लिए बातचीत सबसे अच्छा रास्ता है।
ट्रंप के प्लान से निवेशकों को बड़ा लॉस
ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी के बारे में उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका राष्ट्रपति का मकसद चीन को दंडित करने का है और वह फिर से अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को आकर्षित करना चाहते हैं तो इससे निवेशकों के लिए बड़ा संकट खड़ा होने जा रहा है। आखिरकार ट्रंप को इनफ्लेशन को काबू में रखने पर फोकस करना होगा। नई ट्रेड डील करनी होगी और एंप्लॉयमेंट रेट को सही लेवल पर बनाए रखना होगा तभी उनके टैरिफ का सही फायदा मिलेगा।
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निवेशकों को सस्ते भाव में खरीदारी करनी चाहिए
क्रेमर ने कहा कि ऐसा लगता है कि ट्रंप अपने टैरिफ को लेकर बहुत आगे तक की लड़ाई लड़ने नहीं जा रहे हैं। वह अपनी विजय का ऐलान करेंगे और टैरिफ वापस ले लेंगे। यही वजह है कि 7 अप्रैल को मार्केट काफी ज्यादा गिरने के बाद कुछ हद तक संभलने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि इसलिए निवेशकों को घबराने और उस वजह से अपने स्टॉक्स बेचने की जरूरत नहीं है। यह हो सकता है कि मार्केट ने अभी अपना बॉटम नहीं बनाया हो, लेकिन अभी कई शेयरों की कीमतें काफी नीचे हैं, जिससे उनमें खरीदारी के मौके दिख रहे हैं।