Ketan Parekh: केतन पारेख घोटाले में कौन है 'बड़ा क्लाइंट'? एक्सचेंज के आंकड़ों से नाम का हुआ खुलासा

केतन पारेख (Ketan Parekh) ने जिस विदेशी निवेशक के सौदों में फ्रंट-रनिंग ट्रेड (Front-Running Trade) किया था, वह अमेरिकी इनवेस्टमेंट फर्म टाइटर ग्लोबल (Tiger Global) थी। एक्सचेंज पर मौजूद आंकड़ों से इसकी पुष्टि होती है। शेयर बाजार की रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने एक दिन पहले 2 जनवरी को इस फ्रंट-रनिंग घोटाले का भंड़ाफोड़ किया था। हालांकि सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में 'टाइटर ग्लोबल' का नाम लिया था

अपडेटेड Jan 03, 2025 पर 6:34 PM
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Ketan Parekh: टाइगर ग्लोबल और इसकी स्वामित्व वाले एक फंड ने 11 नवंबर 2022 को पीबी फिनटेक के शेयर बेचे थे

केतन पारेख (Ketan Parekh) ने जिस विदेशी निवेशक के सौदों में फ्रंट-रनिंग ट्रेड (Front-Running Trade) किया था, वह जानी-मानी अमेरिकी इनवेस्टमेंट फर्म टाइटर ग्लोबल (Tiger Global) थी। एक्सचेंज पर मौजूद आंकड़ों से इसकी पुष्टि होती है। शेयर बाजार की रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने एक दिन पहले 2 जनवरी को इस फ्रंट-रनिंग घोटाले का भंड़ाफोड़ किया था। हालांकि सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में 'टाइगर ग्लोबल' का नाम लिया था। सेबी ने कहा था कि अपने जमाने के मशहूर मार्केट ऑपरेटर रहे केतन पारेख और उनके सिंगापुर स्थित सहयोगी रोहित सालगांवकर सहित अन्य ने एक "बड़े क्लाइंट्स" के सौदों में फ्रंट-रनिंग ट्रेड की है। एक्सचेंज पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक यह फ्रंट-रनिंग ट्रेड, पीबी फिनटेक के शेयरों में हुआ था।

स्टॉक एक्सचेंजों के डेटा से पता चला है कि टाइगर ग्लोबल और इसकी स्वामित्व वाले एक फंड ने 11 नवंबर 2022 को पीबी फिनटेक के शेयर बेचे थे। सेबी के आदेश में पीबी फिनटेक का जिक्र गया था, लेकिन इसमें उस फंड या इकाई का नाम नहीं बताया गया है जिसके ट्रेड में कथित गलत काम करने वाले फ्रंट-रनिंग को अंजाम दे रहे थे। इसकी जगह सेबी ने फंड को 'बड़ा क्लाइंट्स' कहकर संबोधित किया था।

सेबी की जांच में पता चला है कि पारेख, सालगांवकर और दूसरे लोगों का समूह न केवल फ्रंट-रनिंग ट्रेड कर रहे थे, बल्कि जब टाइगर ग्लोबल को पीबी फिनटेक के शेयर बेचे गए थे, तब यह समूह खरीददार पक्ष में भी शामिल था।


'फ्रंट-रनिंग' का मतलब ऐसी अवैध गतिविधि से है, जहां फंड मैनेजर/डीलर/ब्रोकर को किसी बड़े लेनदेन की गैर-सार्वजनिक जानकारी पहले से हासिल कर लेते हैं और उसके आधार पर मुनाफा कमाने के लिए अपनी पोजिशन लेते हैं। यानी वे गुप्त जानकारी के आधार पर मार्केट में पैसा लगाकर लाभ कमाते हैं।

SEBI ने 188 पन्नों के अपने आदेश में कहा, "11 नवंबर 2022 को एक 'बड़े क्लाइंट' के 2 फंडों ने पीबी फिनटेक (पॉलिसी बाजार) के शेयर में 52.5 लाख शेयर बेचे। यह देखा गया कि जीआरडी सिक्योरिटीज लिमिटेड (FR1), सालासर स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (FR2) और अनिरुद्ध दमानी (FR3) ने बड़े क्लाइंट के साथ 20.61 लाख शेयरों के लिए अपने ट्रेड का मिलान किया है।"

बीएसई के आंकड़ों से पता चला है कि दो संस्थाओं, टाइगर ग्लोबल एट होल्डिंग्स और इसकी स्वामित्व वाली एक और फंड- इंटरनेट फंड III पीटीई लिमिटेड ने 11 नवंबर 2022 को पीबी फिनटेक के कुल 1.23 करोड़ शेयर बेचे थे। जहां टाइगर ग्लोबल एट होल्डिंग्स ने 76.13 लाख शेयर बेचे, वहीं इंटरनेट फंड III पीटीई लिमिटेड 51.6 लाख इक्विटी शेयरों का विक्रेता था।

टाइगर ग्लोबल ने 11 नवंबर, 2022 को NSE पर भी पीबी फिनटेक के 32.84 लाख से ज्यादा इक्विटी शेयर 388.34 रुपये की कीमत पर बेचे। सेबी के आदेश में एक ग्रुप चैट के कई स्क्रीनशॉट भी शामिल हैं, जिसमें पारेख कथित तौर पर पीबी फिनटेक के शेयरों के बिक्री ऑर्डर के को लेकर दूसरों को ट्रेड करने का निर्देश दे रहा है।

कौन है केतन पारेख?

यह बात साल 2000 के आसपास की है। उस समय शेयर मार्केट में केतन पारेख नाम के एक शख्स को बोलबाला था। कई लोग उसे शेयर मार्केट का अगला हर्षद मेहता भी कहते थे। हर्षद मेहता ने जहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी पकड़ बनाई थी, वहीं केतन पारेख ने अपना बेस कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज को बनाया था। केतन पारेख जिस शेयर को छू लेता, वह रॉकेट बन जाता और जिस शेयर को बेच देता, उस कंपनी का बुरा हाल हो जाता। लेकिन बाद में पता चला कि केतन पारेख प्रमोटरों के साथ सांठगांठ कर शेयरों की कीमतों में बड़ा हेरफेर करता है। उसने पंप एंड डंप स्कीम का इस्तेमाल कर लाखों निवेशकों को चूना लगाया और करोड़ो के घोटाले किए। मामला सामने आने के बाद केतन पारेख को जेल जानी पड़ी और SEBI ने इसे 14 साल के लिए शेयर बाजार से बैन कर दिया था।

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