Share Market Falls: शेयर बाजार में नए साल की शुरुआत से ही जारी तेजी पर आज 3 जनवरी को ब्रेक लग गया। मंदड़िए पूरी तरह से बाजार पर हावी दिखे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 720 अंक टूटकर 79,223.11 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी करीब 184 अंक लुढ़ककर 24,000 के स्तर पर आ गया। खासतौर से आईटी और बैकिंग शेयरों में आज खूब बिकवाली देखने को मिली। यह गिरावट एक बड़ा उलटफेर है क्योंकि इससे पहले 2 दिनों के दौरान बाजार में अच्छी खासी तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स इस दौरान 2.3 फीसदी तक चढ़ गया था। हालांकि आज इंडेक्स ने कारोबार की शुरुआत ही लाल निशान से की। आज की गिरावट के पीछे 4 बड़े कारण क्या रहे, आइए समझते हैं-
1. क्रूड ऑयल के दाम में उछाल
इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव गुरुवार को 1.29 डॉलर या 1.7 प्रतिशत बढ़कर 75.93 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर बंद हुआ। इस तेजी के पीछे कारण चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक बयान है। शी जिनपिंग ने चीन की आर्थिक ग्रोथ को दोबारा रफ्तार देने का अपना इरादा दोहराया है। चीन इस समय कई आर्थिक सुधार कर रहा है, जिसके फ्यूल की मांग बढ़ने का अनुमान जताया रहा है। हालांकि भारत जैसे देश के लिए यह जोखिम की बात है क्योंकि क्रूड की ऊंची कीमतें के चलते देश में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जो बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर कर देता है।
2. ग्लोबल लेवल पर चुनौतीपूर्ण माहौल
ग्लोबल इकोनॉमी के स्तर पर फिलहाल माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 109.22 के स्तर पर पहुंच गया है। रुपये अपने ऐतिहासिल निचले स्तर पर है। इसके अलावा अमेरिका के 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.56% पर पहुंच गई है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) अमेरिका में ही निवेश करने को लेकर आकर्षित हो रहे है और इसका असर भारत जैसे उभरते देशों पर पड़ा रहा है। FIIs यहां पिछले कुछ समय से लगातार बिकवाली कर रहे हैं।
3. अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की कमजोर उम्मीदें
अमेरिका में लेबर मार्केट का हालिया आकड़ा मजबूत रहा है। इसके चलते फेडरल रिजर्व की ओर से इस साल ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की संभावना और कम हो गई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने इस साल 2025 में केवल दो बार ब्याज दरों में कटौती की बात कही है, जबकि पहले 4 बार कटौती की उम्मीद की जा रही थी।
अमेरिका में ब्याज दरों के ऊंची रहने से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार कम आकर्षक बन जाते हैं। इसका असर खासतौर पर आईटी कंपनियों जैसे टीसीएस, इंफोसिस आदि पर देखने को मिलता है, जिनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है।
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर एक अहम टेक्निकल सपोर्ट लेवल है, जिस पर सभी को ध्यान देना चाहिए। रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, अजित मिश्रा ने बताया कि अगर यह स्तर टूटता है, तो निफ्टी आने वाले दिनों में साइडवे ट्रेंड में जा सकता है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा बाजार सेंटीमेंट को देखते हुए, यह तकनीकी स्तर बाजार के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
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