LIC IPO: Economic Times में 3 मार्च 2022 को छपी खबर के मुताबिक LIC के बहुप्रतीक्षित IPO को रूस-यूक्रेन संघर्ष और इसके कारण बाजार में जारी भारी उठापटक के कारण अगले वित्त वर्ष के लिए टाला जा सकता है। बता दें कि देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी LIC ने अपने अईपीओ की अर्जी 13 फरवरी को सेबी में दाखिल कर दी है। इस आईपीओ के ड्रॉफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट (draft offer document) के मुताबिक आईपीओ में सरकार एलआईसी की अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी। LIC IPO को देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा है। पहले इस आईपीओ को इसी मार्च महीनें में ही लाने की बात कही जा रही थी।
एक सरकारी अधिकारी के हवाले से Economic Times की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस आईपीओ को लाने की तैयारी चल रही थी।लेकिन जब दुनिया में इतने बड़े पैमाने का कोई युद्ध चल रहा हो तो निश्चित ही इस आईपीओ की योजना की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
बता दें कि इस आईपीओ के इश्यू प्राइस का निर्धारण अभी होना बाकी है। बाजार जानकारों का अनुमान है कि इस आईपीओ की साइज 63,000 करोड़ रुपए हो सकती है। लोगों में इस बहात को लेकर परेशानी है कि वर्तमान वोलैटिलिटी में इतने बड़े आईपीओ के लिए मुश्किल हो सकती है। इस बीच अमेरिका और दूसरे देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों ने रूसी बाजार को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
यूक्रेन पर रशियन अटैक के चलते ब्रेंट क्रूड (Brent crude) के भाव 2 मार्च को 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए। सेंसेक्स 1.38 फीसदी टूट गया। बॉन्ड ईल्ड में भी बढ़त देखने को मिली है। डॉलर के मुकाबले रुपए में भी भारी गिरावट देखने को मिल रही है। पूर्वी यूरोप के इस संकट ने पूरी दुनिया के बाजारों को भी संकट में डाल दिया है।
सरकारी सूत्रों ने मीडिया को बताया कि इस आईपीओ के लिए कुछ सॉवेरन फंडों के साथ इस हफ्ते और अगले हफ्ते रोड शो आयोजित करने की योजना है। सरकार इस इश्यू का प्रबंधन करने वाली मर्चेट बैंकों के साथ ही सभी दूसरे स्टेक होल्डरों के साथ लगातार संपर्क में बनी हुई है। एलआईसी के आईपीओ के ड्राफ्ट पेपर के मुताबिक इस आईपीओ के ऑफर फॉर सेल के तहत एलआईसी के 31.62 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी जो एलआईसी में सरकार की 5 फीसदी हिस्सेदारी होते हैं। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होगा। इसमें कोई फ्रेश इश्यू नहीं होगा। बता दें कि 30 सितंबर 2021 तक एलआईसी की इम्बेडेड वैल्यू 5.39 लाख रुपए है।