ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी कैपिटल (Macquarie Capital) के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप भाटिया का कहना है कि नए साल यानी 2025 की पहली छमाही में भारतीय शेयर बाजार में 10 पर्सेंट तक का करेक्शन देखने को मिल सकता है। उनका कहना था कि डोमेस्टिक नहीं बल्कि ग्लोबल फैक्टर्स की वजह से यह गिरावट आएगी। जाहिर तौर पर इससे शेयर बाजार में माहौल बदल सकता है।
उन्होंने कहा, 'मैं ऐसा मानने वालों में शामिल नहीं हूं कि घरेलू स्तर पर मौजूद लिक्विडिटी हमेशा बचाव कर लेगी। यह वास्तव में अर्निंग के मोर्चे पर हुई दिक्कत के असर से निपटने में थोड़ा मददगार हो सकती है। भारत को ट्रंप के कार्यकाल के असर को भी मैनेज करना होगा। यह 2025 में बाजार के लिए सबसे अहम फैक्टर होगा।' उनका यह भी कहना था कि अगर जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े बेहतर रहते हैं, तो इससे कुछ चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सकती है।
मैक्वायरी के भाटिया और आदित्य सुरेश, दोनों ने IPOs में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिये प्रमोटर्स और प्राइवेट इक्विटी फर्मों द्वारा बड़े पैमाने पर शेयरों की बिक्री को लेकर चिंता जताई है। भाटिया ने कहा, 'बुल मार्केट के शुरू में निवेशकों के पास कैश और प्रमोटर्स के पास विजन होता है। बुल मार्केट के आखिर में प्रमोटर्स के पास कैश और इनवेस्टर्स के पास विजन होता है।'
उनका कहना था कि जहां तक सेक्टर से जुड़े ट्रेंड की बात है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को चलाने वाले अहम सेक्टर कंजम्प्शन की स्थिति कमजोर है। भाटिया ने कहा कि हालांकि सबसे बुरा दौर संभवत: बीत चुका है और अब इसमें धीरे-धीरे तेजी दिखेगी। सुरेश का यह भी कहना था कि कजम्प्शन के अंदर रिकवरी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग है। उन्होंने बताया, 'टॉप एंड कंजम्प्शन अपेक्षाकृत बेहतर जान पड़ता है, लेकिन रफ्तार सुस्त है। मिडिल कैटेगरी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, बकि ग्रामीण बाजारों में सुधार के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं।'
बहरहाल, सुरेश का कहना था, 'चुनौतियों के बावजूद मैक्वायरी को कुछ डिफेंसिव सेक्टरों से उम्मीद है। हमारी पोजिशन आईटी, फार्मा और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों को लेकर है।'