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Budget 2026 Expectations: मार्केट को इन ऐलानों का इंतजार, ये स्टॉक्स कराएंगे निवेशकों की चांदी!

Market Expectations from Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) लगातार नवें बार देश का बजट पेश करने वाली हैं। इस बजट को लेकर मार्केट को काफी उम्मीदे हैं। जानिए मार्केट को बाजार से क्या उम्मीदें हैं, एक्सपर्ट्स का इसे लेकर क्या कहना है, बजट के ऐलानों से किन स्टॉक्स को फायदा मिलने की उम्मीद है?

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Jan 15, 2026 पर 10:35 AM
Budget 2026 Expectations: मार्केट को इन ऐलानों का इंतजार, ये स्टॉक्स कराएंगे निवेशकों की चांदी!
Budget 2026: एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट से नियर टर्म में मार्केट में जोश आने की उम्मीद कम है क्योंकि न्यूक्लियर और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में काम पूरा होने यानी आउटपुट आने में लंबा समय लगता है।

Market Expectations from Budget 2026: अगले वित्त वर्ष 2027 के बजट का काउंटडाइन शुरू हो चुका है। बाजार को उम्मीद है कि पीएम सूर्य घर रूफटॉप सोलर, ग्रीन एनर्जी कोरिडोर, डिस्कॉम्स के लिए आरडीएसएस, एसएमआर न्यूक्लियर मिशन और पंप्ड स्टोरेज सपोर्ट जैसी योजनाएं जारी रहेंगी। साथ ही बाजार को उम्मीद है कि सरकार का फोकस रिन्यूएबल्स, ग्रिड विस्तार और स्टोरेज पर बना रहेगा। हालांकि नए आवंटन सीमित रह सकते हैं या नियर टर्म में बाजार पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। मार्केट का यह भी मानना है कि बजट मार्केट में जोश भर दे, नियर टर्म में तो इसकी संभावना कम ही दिख रही है लेकिन यह न्यूक्लियर पावर, रिन्यूएबल्स, स्टोरेज और ट्रांसमिशन के लिए लंबे समय की दिशा तय करेगी।

Budget 2026 से ये हैं उम्मीदें और रहेंगी ये चुनौतियां

पहले बजट से उम्मीदों की बात करें तो मार्केट का मानना है कि बजट में रिन्यूएबल्स पर फोकस बना रहेगा जिसे सोलर और रूफटॉप कैपेसिटी एडीशंस से सपोर्ट मिलेगा। साथ ही निजी भागीदारी और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स से न्यूक्लियर पावर का महत्व बढ़ेगा। साथ ही एनर्जी स्टोरेज (बैट्री और पंप्ड हाइड्रो) प्राथमिकता के तौर पर उभर सकता है। अब चुनौतियों की बात करें तो न्यूक्लियर और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में ऊंची लागत और आउटपुट को लेकर लंबा इंतजार, रिन्यूएबल से लैस राज्यों में ट्रांसमिशन से जुड़ी दिक्कतों और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों पर जारी वित्तीय दबाव जैसी दिक्कतें भी हैं।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर अश्विन जैकब का कहना है कि प्रोजेक्ट व्यावहारिक हों, इसके लिए रिन्यूएबल कंपनियों को ग्रुप टैक्स कंसालिडेशन, रिन्यूएबल कंपोनेंट्स पर कम जीएसटी और न्यूक्लियर स्टार्टअप्स को डायरेक्ट टैक्स इंसेंटिव के साथ-साथ बैट्री एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स के लिए डेप्रिसिएसन और आरएंडडी क्रेडिट्स, जीएसटी रेशनलाइजेशन और टैक्स बेनेफिट्स जैसी मांग है। मिरे एसेट शेयरखान के अंकित सोनी को उम्मीद है कि बजट में पावर सेक्टर को स्थिर रखने पर फोकस रहेगा जिसमें ग्रिड विस्तार, ट्रांसमिशन, एनर्जी स्टोरेज और मॉडर्नाइजेशन पर जोर रहेगा। साथ ही रूफटॉप सोलर भी फोकस रहेगा।

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