स्टॉक मार्केट में 5 जून को आई तेजी ने निवेशकों को चौंकाया है। सवाल है कि क्या यह तेजी टिकाऊं है? इस बात से इनकार नहीं कि आगे मार्केट का आउटलुक निश्चित दिख रहा है। हालांकि, बड़े इनवेस्टर्स (एचएनआई) फिलहाल किनारे बैठे हैं। पीएसयू स्टॉक्स में बड़ी पॉजिशन वाले इनवेस्टर्स मुनाफावसूली कर रहे हैं। म्यूचु्अल फंड्स जमकर खरीदारी कर रहे हैं। लेकिन, इसे कोई संकेत नहीं मानना चाहिए, क्योंकि फंड मैनेजर्स के पास निवेश करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
FIIs को खरीदारी की जल्दबाजी नहीं
विदेशी संस्थागत निवेशक खरीदारी की जल्दबाजी में नहीं दिख रहे हैं। आईआईएफएल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बीजेपी को 240 सीटें मिलने से रिफॉर्म्स की कोशिश पर असर पड़ सकता है। उधर, लोकलुभावन उपायों पर फोकस बढ़ सकता है। इसका असर मीडियम टर्म में ग्रोथ पर पड़ सकता है।
जेफरीज ने हिंदुस्तान यूनिलीवर के स्टॉक्स पर अपनी राय 'होल्ड' से बदलकर 'बाय' कर दी है। उसने स्टॉक का टारगेट प्राइस 2,530 रुपये से बढ़ाकर 2,950 रुपये कर दिया है। रूरल ग्रोथ पर दांव लगाने के लिए Hindustan Uniliver के स्टॉक्स में निवेश किया जा सकता है। लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद ऐसा लगता है कि सरकार कंजम्प्शन को बढ़ावा देने वाली पॉलिसी अपनाएगी। यह हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा। उधर, बेयर्स की दलील है कि रूरल ग्रोथ सुस्त है। साथ ही मार्जिन को लेकर भी चैलेंज बना हुआ है। लोकल प्लेयर्स की तरफ से भी चैलेंज मिलता दिख रहा है। इसका असर वॉल्यूम ग्रोथ पर पड़ सकता है।
मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज अपनी पेंशन सब्सिडियरी में इनवेस्ट कर रहा है। उसे इस सेक्टर में बड़ा मौका दिख रहा है। कंपनी एन्युटी बिजनेस की ग्रोथ के लिए एक अलग वर्टिकल बना रही है। मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आबादी में मध्यम उम्र के लोगों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इससे पेंशन और रिटायरमेंट सॉल्यूशंस में अगले दशक में बड़े मौके होंगे। उधर, बेयर्स की दलील है कि IRDAI की पॉलिसी ग्राहकों के पक्ष में झुकी हुई है। सरेंडर चार्ज से जुड़े नियम का असर मार्जिन पर पड़ सकता है। एनपीएस जैसे सेगमेंट्स में यूलिप के मुकाबले एसेट मैनेजमेंट चार्ज बहुत कम है।
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पिछले कुछ सेशंस में Gujarat Gas के स्टॉक में ट्रेडिंग वॉल्यूम सामान्य से ज्यादा रही है। क्लीनर गैस के इस्तेमाल पर फोकस बढ़ने और सख्त नियमों की वजह से वॉल्यूम में इजाफा देखने को मिल सकता है। इकोनॉमी ग्रोथ अच्छी है, जिससे रेजिडेंशियल पीएनजी का इस्तेमाल बढ़ने की उम्मीद है। उधर, बेयर्स की दलील है कि एलएनजी की कीमतें बढ़ रही हैं और ऑयल की कीमतें घट रही हैं। इसका असर प्रतियोगित पर पड़ेगा, जिससे वॉल्यूम घट सकता है। मार्केट एक्सक्लूसिविटी का क्लॉज खत्म होने के बाद मार्केट में नए प्लेयर्स की एंट्री हो सकती है। इससे कपनी के एकाधिकार जैसी स्थिति पर असर पड़ेगा।