Stock Market Outlook: वीकली आधार पर सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे हफ्ते 1-1% चढ़ा। हालांकि फाइनेंशियल्स ने अंडरपरफॉर्म किया। Nifty Bank ने पिछले हफ्ते की आधी वीकली बढ़त गंवाई। वहीं Midcap ने वीकली आधार पर आउटपरफॉर्म किया। ऐसे में बाजार की आगे की चाल और Axis Flexi Cap Fund की स्ट्रैटेजी पर बात करते हुए एक्सिस म्यूचअल फंड के सीनियर इक्विटी फंड मैनेजर सचिन रेलेकर (Sachin Relekar) ने कहा कि आने वाला साल भी एक्शन पैक्ड रहेगा । टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। डोमेस्टिक रिफॉर्म्स लगातार हो रहे हैं। बजट में इनकम टैक्स में बदलाव हुआ। अब GST रिफॉर्म्स भी आगे बढ़ रहे हैं। भारत का मैक्रो आउटलुक स्टेबल दिख रहा है। इंडिया के पास ग्लोबल सप्लाई चेन में जुड़ने का अवसर मिला। डोमेस्टिक थीम्स को लेकर पॉजिटिव आउटलुक बना हुआ। मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस, कंजप्शन स्पेस में तेजी संभ है इनका लॉन्ग-टर्म आउटलुक पॉजिटिव है।
वैल्युएशन पर राय देते हुए उन्होंने कहा कि मिड-स्मॉलकैप में धीरे-धीरे कंफर्ट आ रहा है। अर्निंग्स की एक्सपेक्टेशन भी रीसेट हुई है। अभी वैल्यूएशन पूरी तरह सस्ता नहीं हुआ है। केवल मिड या स्मॉलकैप बकेट देखकर निवेश ना करें। निवेश के लिए सेलेक्टिव अप्रोच अपनाएं। हर कंपनी का ग्रोथ आउटलुक अलग है। सही सेक्टर/कंपनी चुनने पर अच्छे रिटर्न की संभावना है।
फ्लेक्सी कैप फंड पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि फ्लेक्सी कैप फंड्स में कोई कैप लिमिट नहीं होती। लार्ज, मिड, स्मॉल किसी भी कैटेगरी में निवेश किया। फंड मैनेजर को पूरी फ्लेक्सिबिलिटी होती है। मार्केट साइकिल के हिसाब से एक्सपोजर का फैसला लिया। फंड में निवेश से डायवर्सिफिकेशन का फायदा मिलेगा। फंड की इन्वेस्टमेंट अप्रोच पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अप्रोच पूरी तरह सेलेक्टिव, किसी फिक्स्ड % पर फोकस नहीं। तीन चीजों पर बेस्ड इन्वेस्टमेंट फिलॉसोफी है। क्वालिटी: मैनेजमेंट, ट्रैक रिकॉर्ड, कैपिटल एलोकेशन पर फोकस होता है जबकि ग्रोथ की बात करें तो कंपनी में मार्केट अपॉर्चुनिटी कितनी बड़ी है यह देखने होगा। रिस्क-रिवॉर्ड: आज की प्राइस पर रिस्क-रिटर्न का बैलेंस होता।
डिफेंस शेयरों पर बात करते हुए इनका कहना है कि आने वाले समय में डिफेंस स्पेस में बड़े बदलाव होंगे। टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन से लेकर मौके मिलेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स, एविएशन में अपग्रेडेशन देखने को मिलेगा। मिसाइल टेक्नोलॉजी में अपग्रेडेशन होगा। इंडस्ट्रियलाइजेशन, प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ेगी। गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का भी बड़ा रोल है। डिफेंस सेक्टर में क्वांटम जंप की संभावना है।
वहीं आईटी पर अपनी राय देते हुए सचिन रेलेकर ने कहा कि IT सेक्टर में आगे बढ़िया मौके है। सेक्टर का कैश फ्लो, ROE, गवर्नेंस बढ़िया है । फिलहाल ग्लोबल डिमांड स्लोडाउन का असर देखने को मिलेगा। डील्स साइन हो रहे हैं, लेकिन रेवेन्यू कन्वर्जन स्लो है। अभी फंड का एक्सपोजर अंडरवेट रखा है।
हमारा फोकस हेल्थकेयर सेक्टर में डोमेस्टिक की तरफ ज्यादा फोकस है। हॉस्पिटल्स में एक्सपोजर ज्यादा है । ब्रांडेड फॉर्म्युलेशंस, जेनरिक में सेलेक्टिव है। हालांकि हम एनर्जी सेक्टर और कमोडिटी पर अंडरवेट नजरिया बना हुआ है।
रियल्टी सेक्टर पर राय देते हुए उन्होंने कहा कि टॉप 7 शहरों में हाउस ओनरशिप अभी भी काफी पीछे है। RERA और रेगुलेटरी रिफॉर्म्स से फायदा मिलेगा। ब्रांडेड/लार्ज डेवलपर्स का मार्केट शेयर बढ़ रहा है। कमर्शियल रियल एस्टेट का आउटलुक मजबूत हुआ। टॉप 3 शहरों में डिमांड–सप्लाई गैप बड़ा है। सेक्टर कंसोलिडेशन मोड में है । लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन की अपॉर्चुनिटी है।
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