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मार्केट क्रैश नहीं करेगा, लेकिन स्मॉलकैप स्टॉक्स को लेकर सावधानी बरतें, फर्स्ट ग्लोबल की देविना मेहरा ने ऐसा क्यों कहा?

इस हफ्ते की शुरुआत में पहले ग्लोबल और फिर इंडियन मार्केट्स में आई गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया था। लेकिन, तीन-चार दिन में ही मार्केट में अच्छी रिकवरी आई है। इसके बावजूद निवेशक मार्केट की दिशा को लेकर आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 09, 2024 पर 11:37 AM
मार्केट क्रैश नहीं करेगा, लेकिन स्मॉलकैप स्टॉक्स को लेकर सावधानी बरतें, फर्स्ट ग्लोबल की देविना मेहरा ने ऐसा क्यों कहा?
देविना मेहरा ने कहा कि अमेरिकी मार्केट को लेकर उनकी राय निगेटिव नहीं है। पिछले एक साल से ज्यादा समय से फेडरल रिजर्व अमेरिकी इकोनॉमी और लेबर मार्केट में सुस्ती लाने की कोशिश कर रहा था। अब उसके नतीजे दिखने लगे हैं।

महज 2-4 दिन में मार्केट की तस्वीर बदल गई है। अमेरिकी में मंदी की बात हो रही थी। एक्सपर्ट्स फेडरल रिजर्व के जल्द इंटरेस्ट रेट्स घटाने के अनुमान जता रहे थे। जापान में येन कैरी ट्रेड में अनवाइंडिंग ने फाइनेंशियल मार्केट्स पर दबाव बढ़ा दिया था। अब सब कुछ ठीक लग रहा है। सवाल है कि क्या मार्केट्स को लेकर अब कोई चिंता नहीं रह गई है, क्या इंडियन मार्केट्स में तेजी जारी रहेगी, क्या वैल्यूएशन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए मनीकंट्रोल ने देविना मेहरा से बातचीत की। मेहरा फर्स्ट ग्लोबल की चेयरपर्सन हैं। उन्हें इंडियन और ग्लोबल मार्केट्स का तीन दशक से ज्यादा अनुभव है।

अमेरिकी इकोनॉमी में संकट नहीं 

क्या अमेरिकी मार्केट (US Markets) में दिक्कत दिख रही है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "जहां तक मेरी बात है तो अमेरिकी मार्केट को लेकर मेरी राय निगेटिव नहीं है। पिछले एक साल से ज्यादा समय से फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) अमेरिकी इकोनॉमी और लेबर मार्केट में सुस्ती लाने की कोशिश कर रहा था। अब उसके नतीजे दिखने लगे हैं। इसलिए इसे संकट नहीं कहा जा सकता।" येन कैरी ट्रेड के बारे में उन्होंने कहा कि हम यह भूल जाते हैं कि येन (Yen) और डॉलर (Dollar) के इंटरेस्ट रेट में कई दशकों से फर्क रहा है। जब येन में मजबूती आती है तो समस्या शुरू हो जाती है। हम पहले भी ऐसा देख चुके हैं। 1990 के दशक में एशियाई क्राइसिस और फिर 2008 में ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के वक्त भी ऐसा हुआ था। लेकिन, कभी यह संकट की मुख्य वजह नहीं रहा।

सिर्फ लिक्विडिटी की वजह से तेजी नहीं टिक सकती

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