Middle East Crisis: अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद से शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई है। आम तौर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने पर सोने और चांदी में तेजी आती है। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं दिख रहा। इस लड़ाई के शुरू होने के बाद से बिटकॉइन को पंख लग गए हैं।
छह हफ्तों के हाई लेवल पर पहुंचा बिटकॉइन
Bitcoin करीब 4 फीसदी के उछाल के साथ करीब 74,500 डॉलर पहुंच गया है। यह बीते छह हफ्तों में इसका सबसे हाई लेवल है। यह दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। हालांकि, यह अब भी अक्तूबर के अपने पीक से काफी नीचे है। लेकिन, अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद यह 12 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। ऐसी तेजी इस दौरान शायद ही किसी दूसरे एसेट क्लास में आई है।
दूसरे डिजिटल एसेट्स में भी अच्छी तेजी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया में अनिश्चितता बढ़ने पर गोल्ड में तेजी आती है। लेकिन, इस महीने यह करीब 5 फीसदी गिरा है। इसके उलट बिटकॉइन में तेजी देखने को मिली है। दूसरे डिजिटल एसेट्स में भी उछाल दिखा है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Ether 10 फीसदी चढ़ा है, जबकि Solana और XRP में 8-9 फीसदी की तेजी आई है।
संस्थागत निवशकों की डिजिटल एसेट्स में बढ़ी दिलचस्पी
डिजिटल एसेट्स में यह तेजी रिटेल निवेश की वजह से नहीं है। अमेरिका में लिस्टेड बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में बीते हफ्ते 76.3 करोड़ डॉलर से ज्यादा का नेट इनफ्ले आया है। यह तेजी का लगातार तीसरा हफ्ता है। कॉइनग्लास के डेटा के मुताबिक, मार्च में कुल निवेश 1.3 अरब डॉलर पार कर गया है। इससे डिजिटल एसेट्स में इंस्टीट्यूशन पार्टिसिपेशन बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।
बिटकॉइन फंडों में लड़ाई शुरू होने के बाद बढ़ा निवेश
iShares Bitcoin Trust और Fidelity Wise Origin Bitcoin Fund जैसे फंडों में तो मध्यपूर्व की लड़ाई के शुरुआती दिनों से ही ज्यादा दिलचस्पी देखने को मिल रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि इनवेस्टर्स जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच भी क्रिप्टो में ऐलोकेशन बढ़ा रहे हैं। उधर, डेरिवेटिव्स की पोजीशनिंग को देखने से इस तेजी के पीछे टेक्निकल कारण नजर आते हैं। बताया जाता है कि मार्केट मेकर्स ने करीब 75,000 डॉलर के लेवल पर भारी पोजीशन बना रखी है।
अमेरिका-ईरान की लड़ाई दो हफ्तों से ज्यादा समय से जारी है
अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले की शुरुआत की थी। उसके बाद ईरान ने जवाबी हमले किए। तब से दोनों में से कोई पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस लड़ाई का सबसे ज्यादा असर क्रूड ऑयल और गैस की सप्लाई और कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड का भाव बीते कई दिनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत में रसोई गैस की सप्लाई में कमी आई है।