मुस्लिम विवाह ये एक करार होता है जिसके कई शेड होते हैं। ये हिंदू विवाह की तरह संस्कार नहीं है। मुस्लिम तलाक के बाद सामने आये कई अधिकार और कर्तव्यों को पूरा नहीं करते हैं। बंगलुरू के भुवनेश्वरी नगर में एजाजुर रहमान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी की।
