Sensex पहली बार 80,000 अंक के पार, जानें म्यूचुअल फंड में निवेश की क्या होनी चाहिए रणनीति

म्यूचुअल फंड में निवेश की रणनीति, किसी स्टॉक में सीधे निवेश करने से अलग होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के पास अच्छी तरह से डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो हैं और जो SIP के जरिए लंबी-अवधि के लिए मंथली निवेश करते हैं, उन्हें निवेश जारी रखना चाहिए

अपडेटेड Jul 03, 2024 पर 9:01 PM
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Sensex को 70,000 से 80,000 अंक का सफर तय करने में महज 7 महीने का वक्त लगा

Sensex Crosses 80000: बीएसई सेंसेक्स ने बुधवार 3 जुलाई को कारोबार के दौरान पहली बार 80,000 के पार चला गया। इससे पहले सेंसेक्स ने 11 दिसंबर 2023 को पहली बार 70,000 का आंकड़ा पार किया था। इंडेक्स को 10,000 अंकों की छलांग लगाने में महज 7 महीने का वक्त लगा। एंजेल वन (Angel One) में रिसर्च, टेक्निकल और डेरिवेटिव के हेड समीत चव्हाण ने कहा, "बेंचमार्क इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर खुला, लेकिन बाद में इसमें कुछ करेक्शन आया। हालांकि, बुल्स ने मामूली रिकवरी की और पूरे कारोबार के दौरान रस्साकशी जारी रही।" NSE के निफ्टी इंडेक्स ने इस दौरान 24,300 के स्तर को पार कर नई ऊंचाई छुआ।

शेयर बाजार में इस तेजी के बीच फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स, म्यूचुअल फंड निवेशकों को सावधानी बरतने और जोखिम भरे सेक्टर्स में बड़ा निवेश करने से बचने की सलाह दे रहे हैं।

SIPs के साथ बने रहें

म्यूचुअल फंड में निवेश की रणनीति, किसी स्टॉक में सीधे निवेश करने से अलग होती है। आम तौर पर बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर मुनाफावसूली करने, नए निवेश को रोकने या स्टॉक में भारी निवेश करने का लक्ष्य नहीं बनाते हैं। जिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के पास अच्छी तरह से डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो हैं और जो SIP के जरिए लंबी-अवधि के लिए मंथली निवेश करते हैं, उन्हें निवेश जारी रखना चाहिए।


गेनिंग ग्राउंड इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के फाउंडर रवि कुमार टी वी ने कहा, "ये निवेशक समझते हैं कि शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार लंबी अवधि में ऊपर की ओर बढ़ते हैं। इंडेक्स को देखकर बार-बार रीबैलेंस करने से अधिक चिंता हो सकती है और यह लंबी अवधि में मिलने कंपाउंडिंग रिटर्न के असर को भी कम कर सकता है।"

उन्होंने कहा, "शेयर बाजार इस समय ऑलटाइम हाई पर है। ऐसे में बतौर निवेशक आप इसपर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, यह आपके पर्सनल फाइनेंशियल गोल, जोखिम सहने की क्षमता और निवेश की अवधि आदि पर निर्भर करता है। निवेशकों को लॉन्ग-टर्म तक शेयर को होल्ड करने की क्षमता को समझना चाहिए, और शेयर पर कोई भी एक्शन लेने से पहले अपने डिस्ट्रीब्यूटर्स या एडवाइजर्स से सलाह लेना चाहिए।"

कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान ने बताया कि कोविड के समय चार साल पहले सेंसेक्स करीब 26,000 के स्तर पर था। उन्होंने कहा, "यह सपने जैसा लगता है लेकिन यह सच है। इससे यह भरोसा मिलता है कि शेयर मार्केट ने लंबे समय में अच्छा प्रदर्शन किया है, हमें निवेश करते समय और उसके बाद भी धैर्य और आत्मविश्वास की जरूरत है। हमारी सलाह है कि लंबी अवधि के लक्ष्य के साथ इक्विटी मार्केट में SIP के जरिए निवेश करना जारी रखें।"

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