शेयर बाजार के उतारचढ़ाव से बेफिक्र म्यूचुअल फंड हाउस, जानिए कहां कर रहे हैं खरीदारी

आमतौर पर जब कोई फंड मैनेजर निवेशकों के पैसों को किसी गिरावट की स्थिति से सुरक्षित रखना चाहता है। तब वह कैश कॉल लेता है। वहीं, कैश कॉल का मतलब होता है निवेश के लिए अपने पास पैसे बचा कर रखना

अपडेटेड Dec 20, 2022 पर 7:05 PM
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आमतौर पर जब कोई फंड मैनेजर निवेशकों के पैसों को किसी गिरावट की स्थिति से सुरक्षित रखना चाहता है। तब वह कैश कॉल लेता है

इक्विटी वैल्यू के हिसाब से देखें तो फिलहाल में भारत के टॉप म्यूचुअल फंड्स की कैश हल्डिंग 5.4 फीसदी है। यह पिछले 5 साल के 3.5 फीसदी के औसत से ज्यादा है। हालांकि यह PMS-AIF (Portfolio Management Services- Alternative Investment Fund) के एग्रेसिव कैश कॉल की तुलना में ये बहुत कम है। गौरतलब है कि कई बार तो PMS-AIF की कैश होल्डिंग कुल फंड के 50 फीसदी से ज्यादा तक होती है। मनीकंट्रोल के म्यूचुअल फंड समिट में ICICI Prudential AMC के एस नरेन ने कहा कि अधिकांश निवेशकों का मानना है कि अगर मार्च 2020 जैसी कोई घटना होती भी है तो उसके तुरंत बाद हमें अप्रैल 2020 भी देखने को मिलेगा।

इस स्थिति में कैश पर बैठे फंड हाउस बाजार में किसी तेज रैली के आने पर बेंचमार्क की तुलना में पिछड़ते नजर आ सकते हैं। बता दें कि कोरोना वायरस के डर के चलते मार्च 2020 में निफ्टी में 23 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी। लेकिन उसके अगले महीने यानी अप्रैल 2020 में ही 14.6 फीसदी की जोरदार रिकवरी देखने को मिली थी। बताते चलें कि आमतौर पर जब कोई फंड मैनेजर निवेशकों के पैसों को किसी गिरावट की स्थिति से सुरक्षित रखना चाहता है। तब वह कैश कॉल लेता है। वहीं, कैश कॉल का मतलब होता है निवेश के लिए अपने पास पैसे बचा कर रखना।

IDFC MF के अनूप भास्कर का कहना है कि सिर्फ छोटी अवधि के लिए गिरावट से सुरक्षा की बात की जा सकती है। लेकिन कि तेजी में भागीदारी करना ज्यादा बड़ी बात होती है। अनूप भास्कर ने बताया कि उन्होंने 2008 और 20202 में दो बार कैश कॉल ली। दोनों बार उनको निराशा का सामना करना पड़ा। ऐसे में तीसरी बार उन्होंने इस रणनीति को नहीं अपनाया। वर्तमान में IDFC MF के पास 5.8 फीसदी कैश होल्डिंग है। जबकि ICICI Prudential AMC के पास 8.2 फीसदी कैश होल्डिंग है। वहीं, SBI MF की कैश होल्डिंग 9.7 फीसदी है।


SBI MF के आर श्रीनिवासन ने कहा कि अगर कोई निवेशक मेरे फंड में पैसे डालता है तो मैं यह मानूंगा कि उसने इक्विटी में निवेश करने के लिए ये पैसे लगाए हैं। उन्होंने आगे कहा कि मार्केट टाइमिंग की बात ओवररेटेड है। मेरे लिए यह जरूरी होगा कि मैं निवेशक के इक्विटी निवेश को बेहतर तरीके से करूं जिससे कि उसे तुलनात्मक रूप से बेहत रिटर्न मिल सके।

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म्यूचुअल फंड्स की कोई कैश लिमिट नहीं

बतातें चलें कि मार्केट रेगुलटेर सेबी ने म्युचुअल फंड्स की कोई कैश लिमिट नहीं तय कर रखी है। फंड मैनेजर सामान्य तौर पर 5 से 10 फीसदी कैश होल्ड करके रखते हैं। जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि वर्तमान समय में म्युचुअल फंडों की कुल कैश होल्डिंग 5 साल के औसत से ज्यादा है। इसकी वजह ये है कि हाई वैल्यूएशन, मंदी का डर, बढ़ती वोलैटिलिटी ने बाजार के जोश पर लगाम लगाए रखा है।

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