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Exclusive: बड़े म्यूचुअल फंड हाउसों को घटानी पड़ सकती है अपनी फीस, SEBI बना रहा नए नियम

म्यूचुअल फंड स्कीमों के एक्सपेंस रेशियों (Expense Ratio) में आने वाले समय में कमी देखने को मिल सकती है। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) कुछ बड़े म्यूचुअल फंड (MF) हाउसों को अधिक एक्सपेंस रेशियो वसूलने से रोकने के बारे में विचार कर रहा है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Jan 27, 2023 पर 10:34 PM
Exclusive: बड़े म्यूचुअल फंड हाउसों को घटानी पड़ सकती है अपनी फीस, SEBI बना रहा नए नियम
फिलहाल ₹500 करोड़ तक के AUM वाली स्कीमों पर अधिकतम एक्सपेंस रेशियो 2.25% हो सकता है

म्यूचुअल फंड स्कीमों के एक्सपेंस रेशियों (Expense Ratio) में आने वाले समय में कमी देखने को मिल सकती है। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) कुछ बड़े म्यूचुअल फंड (MF) हाउसों को अधिक एक्सपेंस रेशियो वसूलने से रोकने के बारे में विचार कर रहा है। SEBI ने दिसंबर 2022 में बताया कि म्यूचुअल फंड हाउस अपने यूनिटहोल्डरों से जिन खर्चों के लिए फीस वसूलते हैं, उसने उन पर फिर से विचार करने के लिए एक इंटरनल स्टडी शुरू की है। मनीकंट्रोल को अब पता चला है कि सेबी फंड हाउसों के कुल इक्विटी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के आधार पर सीमा तय कर सकता है और फंड हाउसों को उसी के आधार पर एक्सपेंस रेशियो वसूलना होगा।

उदाहरण के लिए, अगर किसी फंड हाउस का इवक्विटी AUM 50,000 करोड़ रुपये का है, तो फंड हाउस को मौजूदा स्कीमों के साथ-साथ नई स्कीमों के लिए मौजूदा नियमों की तुलना में कम एक्सपेंस रेशियो वाला बनाना होगा। मनीकंट्रोल को पता चला है कि ऐसे फंड हाउसों के लिए नया एक्सपेंस रेशियो 1.25 फीसदी या 1.50 फीसदी हो सकता है।

ऐसा लगता होता है कि SEBI ने म्यूचुअल फंड स्कीमों में पैसे आने के तरीकों से जुड़े आंकड़ों को अध्ययन किया है। सेबी ने पाया कि जब कोई फंड हाउस, खासतौर से बड़े और मझोले साइज वाले म्यूचुअल फंड कोई नई स्कीम लॉन्च करते हैं, तो कुछ डिस्ट्रीब्यूटर अपने निवेशकों का पैसा मौजूदा योजनाओं से निकालकर नई योजनाओं में डालते हैं।

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