सेंसेक्स और निफ्टी में 8 जनवरी को बड़ी गिरावट आई। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ज्यादा टैरिफ लगाने की धमकी का भी हाथ है। लगातार चौथे दिन मार्केट के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई। इससे इनवेस्टर्स की चिंता बढ़ गई है। उनके मन में यह सवाल चल रहा है कि क्या यह थोड़े समय की गिरावट है या यह कमजोरी जारी रहने वाली है।
8 जनवरी को मार्केट में बड़ी गिरावट
8 जनवरी को Sensex 780 प्वाइंट्स (0.92 फीसदी) से ज्यादा गिर गया। कारोबार के अंत में यह 84,180.96 अंक पर बंद हुआ। सिर्फ इस हफ्ते यह सूचकांक 1,581 अंक यानी 1.8 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। 8 जनवरी को निफ्टी 264 अंक यानी 1.01 फीसदी गिरकर 25,876 पर बंद हुआ। 2026 में निफ्टी पहली बार 26,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। बीते चार दिनों में यह करीब 452 अंक यानी 1.7 फीसदी गिर चुका है।
ट्रंप की धमकी से गिरा मार्केट
मार्केट में गिरावट की एक बड़ी वजह उस बिल को ट्रंप का एप्रूवल है, जिसमें रूस से ऑयल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी का टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। रूस से ऑयल खरीदने वाले देशों में भारत शामिल है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि इस बिल के पारित होने पर उन देशों पर शिकंजा कसेगा जो रूस से ऑयल खरीदकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की लड़ाई जारी रखने की क्षमता को बढ़ा रहे हैं।
FIIs की बिकवाली का भी पड़ा असर
शेयर बाजार में गिरावट की दूसरी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली है। वीकली एक्सपायरी के दिन मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया। इसका असर इनवेस्टर्स के सेंटिमेंट पर पड़ा। इस साल की शुरुआत में निफ्टी ने ऑल-टाइम हाई बना दिया था। इसने सितंबर 2024 के रिकॉर्ड को तोड़ दिया था। इससे निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
निफ्टी 55 डे ईएमए से ऊपर कायम
हालिया गिरावट के बावजूद निफ्टी 55- डे EMA से ऊपर बना हुआ है। मास्टर कैपिटल सर्विसेज के एवीपी (रिसर्च एंड एडवायजरी) विष्णु कांत उपाध्याय ने कहा, "निफ्टी के इस लेवल ने इससे पहले स्ट्रॉन्ग सपोर्ट लेवल का काम किया है।" जब तक निफ्टी 25,850 के लेवल से ऊपर बना हुआ है, लोअर लेवल पर खरीदारी आ सकती है। अगर सपोर्ट का यह लेवल टूटता नहीं है तो निफ्टी 26,200-26,300 की तरफ बढ़ सकता है।
बाजार को किसी पॉजिटिव ट्रिगर की जरूरत
प्राइमस पार्टनर्स के मैनेजिंग डारेक्टर श्रवण शेट्टी ने कहा कि टेक्निकल रूप से मार्केट कमजोर दिख रहा है। ऐसे में इसे पॉजिटिव ट्रिगर की जरूरत है। कोई पॉजिटिव डेटा या सरकार खासकर फाइनेंस मिनिस्ट्री की तरफ से बड़े ऐलान से ट्रेंड पलट सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के भारत पर टैरिफ बढ़ाने की आशंका दिख रही है। इससे मार्केट में और गिरावट आ सकती है। विदेशी फंडों की बिकवाली भी जारी है। इस बिकवाली से आगे दबाव बढ़ सकता है।