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शेयर बाजार में इस थीम से बनेगा पैसा? नोमुरा ने इन 19 शेयरों पर लगाया दांव, Nifty को दिया नया टारगेट

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा (Nomura) ने अपनी नई रिपोर्ट में निफ्टी के लिए टारगेट घटाया है। ब्रोकरेज ने मार्च 2026 तक के लिए Nifty का नया टारगेट 24,970 रखा है। साथ ही उसने निफ्टी का वैल्यूएशन वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित EPS के 19.5 गुना पर रखा है। इससे पहले नोमुरा ने निफ्टी का वैल्यूएशन 18.5 गुना के मल्टीपल पर रखा था

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Apr 21, 2025 पर 6:41 PM
शेयर बाजार में इस थीम से बनेगा पैसा? नोमुरा ने इन 19 शेयरों पर लगाया दांव, Nifty को दिया नया टारगेट
नोमुरा ने निवेशकों को अधिक वैल्यूएशन वाले शेयरों से साफ तौर से दूर रहने को कहा है

शेयर बाजार में पिछले 5 दिनों से लगातार तेजी जारी है, लेकिन क्या यह तेजी जारी रहेगी? सेंसेक्स और निफ्टी में इस वित्त वर्ष में कितनी तेजी आ सकती है? कौन-कौन से सेक्टर्स या शेयर हैं, जहां इस साल निवेशकों को पैसा बनता हुआ दिख सकता है? ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Nomura ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में इन सभी सवालों का जबाव दिया है। नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मार्च मार्च 2026 तक Nifty कहां पहुंचेगा, और इस साल किन सेक्टर्स और स्टॉक्स में पैसे लगाए जा सकते हैं।

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने अपनी नई रिपोर्ट में निफ्टी के लिए टारगेट घटाया है। ब्रोकरेज ने मार्च 2026 तक के लिए Nifty का नया टारगेट 24,970 रखा है। साथ ही उसने निफ्टी का वैल्यूएशन वित्त वर्ष 2027 के अनुमानित EPS के 19.5 गुना पर रखा है। इससे पहले नोमुरा ने निफ्टी का वैल्यूएशन 18.5 गुना के मल्टीपल पर रखा था, लेकिन अब उसका मानना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के चलते इक्विटी से जुड़ा रिस्क थोड़ा कम हुआ है और इसी के चलते उसने निफ्टी के वैल्यूएशन में इजाफा किया है।

Nomura का मानना कि निफ्टी अगले एक साल के दौरान अपने एक साल के फॉरवर्ड अर्निंग्स पर 17 से 20 गुना तक के मल्टीपल पर कारोबार करेगा। इसका मतलब है कि निफ्टी का रिटर्न अगले एक साल में -9 पर्सेंट से लेकर +7% के बीच रह सकता है, जो कि इसके वैल्यूएशन पर निर्भर करेगा।

वैसे नोमुरा से पहले कई ब्रोकरेज फर्मों ने पिछले 4-5 महीनों में निफ्टी को लेकर अपने औसत टारगेट प्राइस में कटौती की है। लेकिन नोमुरा को असली चिंता इस बात की है कि, निफ्टी का रिटर्न इस औसत अनुमान से भी कम रह सकता है, खासतौर से अगर GDP के आंकड़ों में नरमी जारी रहती है तो।

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