पिछले कुछ दिनों की जोरदार गिरावट के बाद 20 मई को भारतीय बाजार शानदार तरह से वापसी करते दिखे। गैप-अप ओपनिंग के बाद सेंसेक्स में आज 1200 अंकों का उछाल देखने को मिला। हालांकि 19 मई को विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय इक्विटीस के नेट सेलर रहे थे और इन्होंने 4,900 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी।
इस मौके पर कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट (Kotak Mahindra Asset Management)के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह (Nilesh Shah)ने CNBC-TV18 के साथ हुई अपनी बातचीत में वह तीन कारण गिनाए जिनकी वजह से भारतीय बाजारों से एफआईआई की निकासी देखने को मिल रही है। इसके अलावा उन्होंने अपने पसंदीदा उन सेक्टरों के बारे में भी बात की जिनमें नियर टर्म में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।
भारतीय बाजारों में कब होगी एफआईआई की वापसी
इस बातचीत में नीलेश शाह ने कहा कि अगर आप 21 अक्टूबर से हो रही एफआईआई की बिकवाली पर नजर डालें तो इसमें पहला कारण भारतीय इक्विटीज का तुलनात्मक रुप से महंगा वैल्यूएशन है जबकि दूसरा कारण ये है कि टेबल पर बड़ा मुनाफा दिखने की वजह से एफआईआई मुनाफावसूली कर रहे हैं। एफआईआई की बिकवाली का तीसरा कारण यह है कि उनकी निकासी के लिए भारतीय बाजार पर्याप्त रूप से लिक्विड हैं।
पिछले 10 साल में भारतीय इक्विटी बाजार ने दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में दोगुना रिटर्न दिया है। वर्तमान स्थिति में एफआईआई बढ़ती महंगाई और कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के दौर में कुछ मुनाफा अपने जेब में रखना चाहते हैं। भारत एक ऐसा बाजार है जो उनको कमाई का मौका देने के साथ आसानी से निकलने के रास्ते भी देता है। ऐसे में अभी कुछ समय तक एफआईआई की बिकवाली कायम रहने की उम्मीद है।
अगली कुछ तिमाहियों में किन सेक्टरों में दिख सकती है मजबूती
इस सवाल का जबाव देते हुए नीलेश शाह ने कहा कि शेयरों के चुनाव के लिए सेक्टर के अलावा हम दो और फिल्टर लगाने की सलाह देंगे। वे हैं वैल्यूएशन और गर्वनेंस। इसका मतलब यह है कि हम उन कंपनियों पर दांव लगाना चाहेंगे जोअच्छे वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं और जिसका संचालन अच्छे और मजबूत हाथों में है।
सेक्टर की बात करें तो नीलेश शाह की बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेस, इंडस्ट्रियल, इंजीनियरिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टर के चुनिंदा शेयरों पर दांव लगाने की सलाह है।
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