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NIS Management IPO Listing: ₹111 का शेयर ₹108 पर लिस्ट, फिर लोअर सर्किट, ऐसी है कारोबारी सेहत

NIS Management IPO Listing: कोलकाता की एनआईएस मैनेजमेंट सिक्योरिटी और फैसिलिटी मैनेजमेंट के बिजनेस में है। इसके आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था। आईपीओ के तहत नए शेयर जारी हुए हैं और ऑफर फॉर सेल के तहत भी शेयरों की बिक्री हुई है। चेक करें कंपनी की कारोबारी सेहत कैसी है और आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कैसे करेगी?

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Sep 02, 2025 पर 4:07 PM
NIS Management IPO Listing: ₹111 का शेयर ₹108 पर लिस्ट, फिर लोअर सर्किट, ऐसी है कारोबारी सेहत
NIS Management IPO Listing: एनआईएस मैनेजमेंट का ₹60.01 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 25-28 अगस्त तक खुला था। आज इसके शेयरों की लिस्टिंग हुई है।

NIS Management IPO Listing: सिक्योरिटी और फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज मुहैया कराने वाली एनआईएस मैनेजमेंट के शेयरों की आज BSE SME पर सुस्त एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 3 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹111 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹108.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला बल्कि लिस्टिंग पर उनकी 2.70% पूंजी ही घट गई। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर और नीचे आए। टूटकर यह ₹102.60 (NIS Management Share Price) के लोअर सर्किट पर आ गया और इसी पर बंद भी हुआ यानी कि पहले कारोबारी दिन की समाप्ति पर आईपीओ निवेशक 7.48% मुनाफे में हैं।

NIS Management IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

एनआईएस मैनेजमेंट का ₹60.01 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 25-28 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 3.13 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 2.12 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 9.15 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.10 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹51.75 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 7.44 लाख शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹36.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

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