एनएसई के सीईओ और एमडी आशीष कुमार चौहान ने डेरिवेटिव एक्सपायरी के ड्यूरेशन पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि सेबी डेरिवेटिव की एक्सपायरी की अवधि को लेकर किसी तरह का फैसला करने से पहले मार्केट पार्टिसिपेंट्स की राय लेगा। उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी चर्चा नहीं हुई है। लेकिन ऐसा लगता है कि रेगुलेटर इस बारे में एक कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा।
शुरुआत में वॉल्यूम में आ सकती है गिरावट
दिल्ली में अपनी बायोग्राफी 'स्थितिप्रज्ञ' के हिन्दी एडिशन के लॉन्च के मौके पर चौहान ने कहा कि वीकली की जगह लंबी अवधि की एक्सपायरी को लागू करने से शुरुआत में वॉल्यूम में गिरावट देखने को मिलेगी। लेकिन, बाद में ट्रेडिंग एक्टिविटी में स्थिरता आएगी। पिछले कई हफ्तों से चर्चा है कि सेबी एक्सचेंजों पर वीकली एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट को बंद कर उसकी जगह लंबी एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट की शुरुआत कर सकता है।
एनएसई की लिस्टिंग में लग सकता है समय
एनएसई के शेयरों की स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग के बारे में चौहान ने कहा कि एक्सचेंज ने सेबी के पास नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए इस साल जून में अप्लाई किया था। अभी सेबी से इस सर्टिफिकेट को मंजूरी मिलने का इंतजार है। सेबी से मंजूरी मिल जाने के बाद आरएचपी तैयार करने में 4-5 महीनों का समय लगेगा। इसका मतलब है कि इसके 8-9 महीने बाद एक्सचेंज का आईपीओ आ सकता है।
एक्सचेंज आपस में मिलकर काम करते हैं
उन्होंने इलेक्ट्रिसिटी डेरिवेटिव्स में एनएसई के प्रभुत्व की भी चर्चा की। इस सेगमेंट में एनएसी की 85-90 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा इंस्ट्रूमेंट है जिसे सरकार और रेगुलेटर ने मिलकर तैयार किया है। इसके पीछे इलेक्ट्रिसिटी मार्केट्स में रिफॉर्म का मकसद है। बीएसई और एमएसई के बीच प्रतिस्पर्धा के बारे में उन्होंने कहा कि प्रतिद्वंद्विता से ज्यादा महत्व सहयोग है। उन्होंने कहा कि एक्सचेंज प्रतिद्वंद्वी की जगह सहयोगी के रूप में मिलकर काम करते है।