NSE CO-LOCATION CASE: NSE पर लगा 100 करोड़ रुपये का जुर्माना, SEBI को जांच का आदेश

SAT ने NSE चेयरमैन और CEO को भी राहत दी है। SAT ने NSE चेयरमैन और CEO की पगार रोकने का आदेश खारिज कर दिया। जबकि NSE चेयरमैन और CEO पर रोक मियाद को भी घटा दिया। एनएसई पर 625 करोड़ रुपये के डिस्गॉर्जमेंट SAT ने खारिज कर दिया। SAT का कहना है कि NSE ने को-लोकेशन में अवैध लाभ नहीं कमाया है

अपडेटेड Jan 23, 2023 पर 2:26 PM
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लोड बैलेंसर नहीं लगाने के लिए SAT ने एनएसई को दोषी माना है इसलिए एनएसई पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है

शेयर बाजार में पिछले साल के सबसे चर्चित और हाईप्रोफाइल मामले एनएसई को-लोकेशन केस (NSE CO-LOCATION CASE) में आज Securities Appellate Tribunal (SAT) का ऑर्डर आया है। इस ऑर्डर में को-लोकेशन मामले में NSE को बड़ी राहत मिली है। SAT ने 625 करोड़ की वसूली का आदेश पलट दिया है। अपने आदेश में SAT ने कहा कि NSE ने कोई अवैध लाभ नहीं कमाया है। लिहाजा एनएसई को सिर्फ 100 करोड़ रुपये का जुर्माना भरना होगा। हालांकि ट्रिब्यूनल ने इस मामले में SEBI को जांच का आदेश दिया है। इस आदेश के तहत सेबी को NSE अधिकारियों और ब्रोकर्स के बीच सांठगांठ की जांच करने का आदेश मिला है।

SAT ने अपने आदेश में NSE चेयरमैन और CEO को भी राहत प्रदान की है। SAT ने NSE चेयरमैन और CEO की सैलरी रोकने का आदेश खारिज कर दिया है। इसके साथ ही NSE चेयरमैन और CEO पर रोक मियाद घटाई भी गई है।

बता दें कि इसके पहले पर एनएसई पर 625 करोड़ रुपये के डिस्गॉर्जमेंट का आदेश दिया गया है। लेकिन SAT ने इस आदेश को खारिज कर दिया। SAT ने कहा कि NSE ने को-लोकेशन में अवैध लाभ नहीं कमाया है लिहाजा 625 करोड़ रुपये के डिस्गॉर्जमेंट वसूलना ठीक नहीं है। हालांकि लोड बैलेंसर नहीं लगाना NSE की चूक है ऐसा भी SAT ने अपने आदेश कहा है।


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एनएसई की इस चूक के चलते पर एनएसई पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। SAT ने कहा कि लोड बैलेंसर नहीं लगाने के लिए एनएसई को 100 करोड़ रुपये जुर्माने के तौर पर भरने होंगे। उन्होंने SEBI को ये आदेश भी दिया कि मार्केट रेगुलेटर को 100 करोड़ रुपये काटकर बाकी की रकम एनएसई को लौटानी होगी।

बता दें कि मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने NSE CO-LOCATION CASE में एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण और एनएसई के अन्य अधिकारियों पर गवर्नेंस से जुड़ी खामियों और नियुक्तियों में कांट्रैक्ट के नियमों के उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। इसमें मुख्य रूप से आनंद सुब्रमण्यन को पहले चीफ स्ट्रैटजिक एडवाइजर और बाद में ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर और एमडी का एडवाइजर नियुक्त किया गया था।

 

 

 

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