NSE IPO: ऑफर फॉर सेल में कौन लेना चाहता है हिस्सा? एक्सचेंज ने शेयरहोल्डर्स से पूछा, 27 अप्रैल तक मांगा जवाब

NSE IPO: ईमेल के साथ, NSE ने EOI फॉर्म और कुछ अतिरिक्त दस्तावेज भी शेयर किए हैं, जिनमें OFS में हिस्सा लेने के लिए जरूरी नियम और शर्तें विस्तार से बताई गई हैं। इस घटनाक्रम से NSE की लिस्टिंग की योजनाओं में एक नई तेजी आई है

अपडेटेड Mar 30, 2026 पर 2:56 PM
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NSE IPO का साइज लगभग 23,085 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने अपने IPO की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। NSE ने मौजूदा शेयरधारकों से संपर्क करके यह जानने की कोशिश की है कि क्या वे 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए IPO में हिस्सा लेना चाहते हैं। निवेशकों को भेजे गए एक ईमेल में, एक्सचेंज ने उन शेयरधारकों से 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) मांगा है, जो प्रस्तावित IPO के तहत अपनी होल्डिंग्स का कुछ हिस्सा या पूरी होल्डिंग बेचना चाहते हैं।

इस ईमेल के साथ, NSE ने EOI फॉर्म और कुछ अतिरिक्त दस्तावेज भी शेयर किए हैं, जिनमें OFS में हिस्सा लेने के लिए जरूरी नियम और शर्तें विस्तार से बताई गई हैं। जो शेयरधारक इसमें हिस्सा लेना चाहेंगे, वे OFS नोटिस में बताई गई शर्तों के आधार पर अपने पूरे शेयर या शेयरहोल्डिंग का कुछ हिस्सा बेच सकेंगे।

निवेशकों से कहा गया है कि वे 27 अप्रैल को शाम 5 बजे तक एक्सचेंज को जवाब दें कि वे इसमें हिस्सा लेना चाहते हैं या नहीं। लेटर में कहा गया है, "एक शेयरधारक के तौर पर, आप अपने पास मौजूद कंपनी के इक्विटी शेयरों को IPO में बेचने के लिए OFS नोटिस और उसके अतिरिक्त दस्तावेजों में बताई गई शर्तों के आधार पर, पूरे या कुछ हिस्से में बेच सकते हैं।" इस घटनाक्रम से NSE की लिस्टिंग की योजनाओं में एक नई तेजी आई है।


OFS में हिस्सा लेने के लिए कौन है पात्र

- ऐसे शेयरहोल्डर्स जिनके पास फुली पेड अप इक्विटी शेयर हैं।

- ऐसे शेयरहोल्डर्स, जिनके पास शेयर 15 जून, 2025 (संभावित) से लगातार बने हुए हैं।

क्या हैं शर्तें

- शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को IPO में निवेशक के तौर पर हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होगी।

- अलॉटमेंट की तारीख से 6 महीने तक सभी प्री-ऑफर शेयरों पर लॉक-इन रहेगा।

- 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) जमा करने से IPO में शेयरों के अलॉटमेंट या शेयर बिक्री की कोई गारंटी नहीं मिलती है।

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कितना बड़ा होगा NSE IPO

IPO का साइज 2.5 अरब डॉलर (लगभग 23,085 करोड़ रुपये) रहने का अनुमान है। NSE ने मार्च महीने की शुरुआत में IPO पर काम करने के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज, मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस मेगा इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें सिरिल अमरचंद मंगलदास, Trilegal, और अमेरिका की Latham and Watkins भी शामिल हैं।

NSE IPO पूरी तरह से OFS होगा। इसका मतलब है कि इसमें नए शेयर जारी नहीं होंगे। टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई. और LIC, NSE IPO में शेयर बेच सकते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड और SBI कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड भी इस IPO में शेयर बेच सकते हैं। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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