Nykaa Share price: आखिर नायका के बोनस इश्यू को लेकर क्यों मचा है बवाल? ऐसे समझ सकते हैं पूरा मामला

नायका के शेयरों की लिस्टिंग ने पिछले साल 10 नवंबर को हलचल मचा दी थी। एक साल बाद नायका के शेयर दूसरी वजहों से सुर्खियों में हैं। कंपनी ने बोनस इश्यू (Bonus Issue) का ऐलान किया, जिसकी रिकॉर्ड तारीख 11 नवंबर थी। यह बोनस इश्यू कई सवालों के घेरे में आ गया है

अपडेटेड Nov 19, 2022 पर 2:34 PM
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बोनस इश्यू में कंपनी अपने इनवेस्टर्स को निश्चित अनुपात में अतिरिक्त शेयर एलॉट करती है।
     
     
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    Nykaa Share Price: नायका के शेयरों की लिस्टिंग ने पिछले साल 10 नवंबर को हलचल मचा दी थी। इस आईपीओ में पैसे लगाने वाले इनवेस्टर्स को 80 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंग ने खुश कर दिया था। कंपनी ने आईपीओ में प्रति शेयर 1,125 रुपये के प्राइस पर शेयर एलॉट किए थे। एक साल बाद नायका के शेयर दूसरी वजहों से सुर्खियों में हैं। FSN E-commerce Ventures नायका की पेरेंट कंपनी है। इस साल 10 नवंबर को नायका के शेयरों में प्री-आईपीओ इनवेस्टर्स के लिए लॉक-इन पीरियड खत्म हो गया। कंपनी ने बोनस इश्यू (Nykaa Bonus Issue) का ऐलान किया, जिसकी रिकॉर्ड तारीख (Nykaa bonus issue record date) 11 नवंबर थी। कंपनी का दावा है कि बोनस इश्यू का मकसद शेयरों में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ाना है। लेकिन, कुछ इनवेस्टर्स का कहना है कि उन्हें शेयरों को बेचने से रोकने के लिए कंपनी ने ऐसा किया है।

    बोनस इश्यू क्या है?

    बोनस इश्यू में कंपनी अपने इनवेस्टर्स को निश्चित अनुपात में अतिरिक्त शेयर एलॉट करती है। उदाहरण के लिए अगर अगर किसी बोनस इश्यू के लिए 2:1 का अनुपात तय किया गया है तो इसका मतलब है कि इनवेस्टर को अपने हर एक शेयर पर दो अतिरिक्त शेयर मिलेंगे। बोनस इश्यू के चलते उसके शेयरों की संख्या 1 से बढ़कर 3 हो जाएगी।


    इन 3 शेयरों की टोटल वैल्यू में कोई बदलाव नहीं होगा। इनकी कुल वैल्यू उतन ही होगी, जो पहले एक शेयर की थी। अगर पहले शेयर का प्राइस 900 रुपये था तो बोनस इश्यू के बाद उसका प्राइस 300 रुपये हो जाएगा। 900 को 3 से विभाजित करने पर 300 आता है।

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    कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं?

    कंपनी अगर अपने शेयरों में लिक्विडिटी बढ़ाना चाहती है तो वह बोनस इश्यू का ऐलान कर सकती है। किसी कंपनी के शेयर का प्राइस बहुत ज्यादा होने पर उसमें इनवेस्टर्स की दिलचस्पी कम हो जाती है। इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए कंपनी बोनस इश्यू का ऐलान कर सकती है। इससे शेयर की कीमतें घट जाती है। इससे उसके शेयरों में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी और ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ जाता है।

    कोई कंपनी तब भी बोनस शेयर (स्टॉक डिविडेंड) जारी करती है जब उसके पास पर्याप्त रिजर्व होता है, लेकिन वह कैश डिविडेंड नहीं देना चाहती। CFA (US) गौरव शेट्टी ने कहा, "कैश डिविडेंड की वजह से कंपनी का कैपिटल स्ट्रक्चर बदल जाता है, जबकि स्टॉक डिविडेंड से ऐसा नहीं होता है।"

    नायका के बोनस इश्यू को लेकर क्यों इतनी चर्चा हो रही है?

    नायका के शेयरों का लॉक-इन पीरियड 10 नवंबर को खत्म हो गया। बोनस इश्यू का रिकॉर्ड डेट 11 नवंबर रखा गया। कुछ इनवेस्टर्स का कहना है कि बोनस इश्यू का ऐलान तब किया गया, जब शेयरों का लॉक-इन खत्म हो रहा था। यह कंपनी के मैनेजमेंट की साजिश थी। उसने लॉक-इन पीरियड के बाद इनवेस्टर्स को शेयरों को बेचने से रोकने के लिए यह दांव खेला। उनका मानना है कि आईपीओ के हाई प्राइस पर इस शेयर को खरीदने वाले इनवेस्टर्स को अपने शेयर को बेचने से रोकने की यह कोशिश थी।

    सवाल है कि वे क्यों नहीं अपने शेयर बेच सकेंगे? पहला, अगले कुछ दिनों तक इनवेस्टर्स के डीमैट अकाउंट में बोनस इश्यू के अतिरिक्त शेयर नहीं आएंगे। इसकी वजह यह है कि बोनस शेयर का ट्रांसफर तुरंत नहीं होता है। इसमें रिकॉर्ड डेट से करीब 15 दिन का समय लग जाता है।

    एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि टैक्स के रूप में होने वाले नुकसान की वजह से भी कुछ इनवेस्टर्स शेयरों को बेचना नहीं चाहेंगे। हालांकि, कुछ शेयरों को बेचने से टैक्स के लिहाज से फायदा होगा। अगर कोई इनवेस्टर शेयरों को बेचने का फैसला करता है तो उसकी ज्याादतर होल्डिंग पर ज्यादा रेट से टैक्स लगेगा। इस पर 15 फीसदी का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लागू होगा। बोनस इश्यू का ऐलान अगर नहीं किया जाता तो इनवेस्टर के शेयरों के बेचने पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ता। यह 10 फीसदी होता।

    किसे खतरे की घंटी बजानी चाहिए थी?

    कॉर्पोरेट फ्रॉड इनवेस्टिगेशन एक्सपर्ट विद्या राजाराव का दावा है कि यह बोनस इश्यू रिटेल इनवेस्टर्स के साथ धोखा है। उन्होंने उन लोगों पर सवाल उठाए हैं, जो रिटेल इनवेस्टर्स के हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रहे। राजाराव ने कहा कि नायका के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स खासकर इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को इस इश्यू को लेकर चेतावनी देनी चाहिए थी। उनकी लापरवाही चौंकाने वाली है, क्योंकि इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को कॉर्पोरेट सेक्टर का कई सालों का अनुभव होता है। वे कई सूचीबद्ध कंपनियों के बोर्ड में डायरेक्टर होते हैं। इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को बोनस शेयर इश्यू के असली मकसद को लेकर आवाज उठानी चाहिए थी।

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