OMC shares rise : मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़ोतरी के बाद,हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड,भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों में 3 प्रतिशत तक की तेजी आई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर से बढ़ा दी गई हैं। पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। डीलरों के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 97.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गईं हैं। जबकि डीजल की कीमतें 90.67 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गईं हैं।
यह ताजा बढ़ोतरी पिछले शुक्रवार को की गई चार साल में पहली बार ईंधन की कीमतें बढ़ाए जाने के बाद हुई है। पिछले शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की दरों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। आज की बढ़ोतरी के बाद भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सबसे ज़्यादा फायदा हुआ है। NSE पर इसके शेयर 2.81 प्रतिशत बढ़कर 288.7 रुपये प्रति शेयर पर पहुंच गए।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प में भी तेजी देखने को मिली है। इनमें 2.17 प्रतिशत और 2.27 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिल रही है। रिटेल ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से OMCs को ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त के कारण हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है, क्योंकि ऊंची रिटेल दरें इन कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन को बेहतर बनाती हैं।
OMCs को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी सपोर्ट मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ परमाणु समझौता होने की बहुत अच्छी संभावना है। उनके इस बयान के बाद बाजार को राहत मिली है। ईरान पर ट्रंप की टिप्पणियों के बाद ब्रेंट क्रूड वायदा 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर 109.41 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।
बता दें के हाल के दिनों में डाउनस्ट्रीम तेल कंपनियां जो कच्चे तेल की रिफाइनिंग और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री में शामिल हैं,दबाव में आ गईं हैं,क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से इनपुट लागत बढ़ जाती है और मुनाफे पर असर पड़ता है।
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्होंने ईरान पर होने वाले हमले को रोक दिया है,ताकि उस समझौते पर बातचीत हो सके जिसका मकसद इस संघर्ष को खत्म करना है। यह कदम तब उठाया गया जब तेहरान ने वॉशिंगटन को शांति का एक नया प्रस्ताव भेजा। बाद में उन्होंने कहा कि "बहुत अच्छी संभावना" है कि अमेरिका,ईरान के साथ एक समझौता कर ले ताकि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सके।
ओएमसी कंपनियों पर पिछले हफ्तों में दबाव देखने को मिला है। पिछले महीने जारी एक रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ ने अनुमान लगाया था कि कच्चे तेल की कीमतों के लगातार ऊंचे बने रहने के कारण रिफाइनरीज पर हर महीने लगभग 27,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ग्लोबल एनर्जी मार्केट में होने वाली उथल-पुथल का भारत पर बहुत खराब असर होता है। पश्चिम एशिया में तनाव और तेल के एक परिवहन मार्ग होरमुज स्ट्रेट के आसपास बनी सप्लाई की चिंताओं के चलते हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क तेल की कीमतें इस समय 107 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आस-पास बनी हुई हैं।
एक समय ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। लेकिन अब ये कीमतें घटकर 100-105 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गईं हैं। बता दें कि फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने से पहले,ब्रेंट क्रूड लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर कारोबार कर रहा था।
सरकारी स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड,हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड मिलकर देश के 1,03,000 से अधिक फ्यूल स्टेशनों के नेटवर्क के 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से को नियंत्रित करती हैं। आम तौर पर ये एक साथ ही कीमतों में बदलाव करती हैं।