मुंबई एयरपोर्ट पर आज स्पाइसजेट (SpiceJet) की कई फ्लाइट्स लेट और कैंसिल होने से यात्री परेशान हैं। कुछ उड़ानें घंटों देरी से उंड़ी तो कुछ आखिरी वक्त पर कैसिंल हो गईं। क्या है पूरा मामला समझाते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के रोहन सिंह ने कहा कि मुंबई में स्पाइसजेट की कई उड़ानों में देरी से हंगामा हो गया। SpiceJet की SG 631 फ्लाइट करीब 4 घंटे लेट होने के बाद रद्द कर दी गई। दिल्ली, बंगलुरु और अहमदाबाद की उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं।
सबसे अधिक परेशानी मुंबई से बेंगलुरु जाने वाली स्पाइसजेट की रेड-आई उड़ान को हुई। यह निर्धारित समय से नौ घंटे की देरी से रवाना हुई। मुंबई से दिल्ली और बेंगलुरु जाने वाली रात की अन्य उड़ानें पहले काफी देरी के बाद अंततः रद्द कर दी गईं। मुंबई-अहमदाबाद की दो उड़ानें भी वाराणसी और बागडोगरा में खराब मौसम के कारण देरी से रवाना हुईं।
नाराज यात्रियों ने एयरपोर्ट पर नारेबाजी कर हंगामा किया। इसके बाद CISF ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। कई यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही रात बितानी पड़ी। 29 अप्रैल को 3 उड़ानें रद्द हुई हैं। इनमें SG 631(मुंबई-दिल्ली), SG 553 (मुंबई-गोरखपुर) और SG 669 (मुंबई-बेंगलुरु)शामिल हैं।
इस पर स्पाइसजेट ने अपने बयान में कहा है कि ग्राउंडिंग,खराब मौसम और FDTL लिमिट के चलते उड़ानें रद्द की गई हैं। मुंबई-अहमदाबाद की 2 उड़ानें भी देरी से हुई हैं। प्रभावित यात्रियों के लिए अतिरिक्त फ्लाइट्स चलाई गईं हैं।
बताते चलें कि DGCA की तरफ से जारी मार्च महीने के आंकड़ों के मुताबिक स्पाइसजेट का ऑन-टाइम प्रदर्शन (OTP) केवल 43 प्रतिशत रहा है जो भारतीय एयरलाइनों में सबसे खराब प्रदर्शन है। मुंबई हवाई अड्डे पर तो इसका प्रदर्शन और भी खराब रहा है। यहां केवल 29 प्रतिशत उड़ानें ही सही समय पर रवाना हो सकीं है। वहीं हैदराबाद में इसका OTP सबसे बेहतर रहा,जहां 64 प्रतिशत उड़ानें समय पर चलीं हैं।
SpiceJet के शेयर पर एक नजर
SpiceJet के शेयर की बात करें तो फिलहाल ये शेयर 0.51 रुपए यानी 3.65 फीसदी की गिरावट के साथ 13.46 रुपए के आसपास दिख रहा है। आज का इसका दिन का लो 13.28 रुपए और दिन का हाई 13.85 रुपए है।
आज ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए $126 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी। इसके चलते गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होने वाली कंपनियों के शेयर नीचे गिरे। इसमें SpiceJet और InterGlobe Aviation के शेयर भी शामिल हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आमतौर पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल की लागत को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं,जो एयरलाइंस के लिए एक बड़ा खर्च होता है।
मिडिल ईस्ट में लगातार चल रहे सैन्य तनाव,ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी और कमर्शियल शिपिंग को बार-बार मिल रही धमकियों ने टैंकरों की आवाजाही को काफी हद तक कम कर दिया है। इससे ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई काफी कम हो गई है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो जिन सेक्टरों में ईंधन और कच्चे तेल से जुड़े खर्च ज़्यादा होते हैं,वे दबाव में रह सकते हैं।