Pharma Stocks : सेमाग्लूटाइड का पेटेंट हुआ खत्म, भारतीय फार्मा कंपनियों को लिए बड़े मौके

Pharma Stocks : सेमाग्लूटाइड में भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा मौका है। ब्लॉकबस्टर दवा सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म होने से इसके जेनरिक वर्जन लॉन्च हो सकेंगे। देश की 40 से ज्यादा कंपनियां 50 से ज्यादा ब्रांड लॉन्च करने की तैयारी में है

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 2:13 PM
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Semaglutide Patent Expiry : डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज़, ज़ाइडस लाइफसाइंसेज़ और नैटको फार्मा इस दवा को लॉन्च करने के लिए तैयार है

Pharma Stocks : फार्मा कंपनियों लिए बेहद पॉजटिव खबर है। डायबिटीज और वजन घटाने की ब्लॉकबस्टर दवा सेमाग्लूटाइड (SEMAGLUTIDE) का पेटेंट 20 मार्च को खत्म हो गया है। सेमाग्लूटाइड को टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए विकसित किया गया था। लेकिन,बाद में यह मोटापे को नियंत्रित करने में भी बेहद प्रभावी पाया गया। नोवो नॉर्डिस्क के पास इसका पेटेंट था। अब यह खत्‍म हो चुका है। इस कारण अब भारतीय कंपनियां भी वेगोवी और ओजेम्पिक के जेनेरिक दवा बना सकेगी।

इस दवा का कितना बड़ा बाजार है और भारतीय कंपनियों की क्या तैयारी है, इस पर सीएनबीसी-आवाज़ के एक पूरी रिसर्च तैयार की है। आइए इस पर डालते हैं एक नजर।

सेमाग्लूटाइड में भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा मौका है। ब्लॉकबस्टर दवा सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म होने से इसके जेनरिक वर्जन लॉन्च हो सकेंगे। इंडियन एक्‍सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक बाजार में अभी केवल नैटको और एरिस ने शुरुआत की है। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार,डॉ. रेड्डीज,जायडस,ल्यूपिन और अल्केम जैसी करीब 43 भारतीय दवा कंपनियों को इस साल्ट के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है या वे पाइपलाइन में हैं। आने वाले महीनों में जब ये सभी कंपनियां मैदान में उतरेंगी तो प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी।


क्या है सेमाग्लूटाइड?

सेमाग्लूटाइड GLP-1 आधारित दवा है। इसका इस्तेमाल डायबिटीज और वजन घटाने में होता है। ग्लोबल स्तर पर इसकी भारी डिमांड है।

सेमाग्लूटाइड का मार्केट

भारत का GLP-1 मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है। भारत में GLP-1 की सालाना बिक्री 1,000 करोड़ रुपए के पार है। जेनरिक लॉन्च के बाद 12–15 महीनों में 5,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के मौके हैं।

क्या है सबसे बड़ा ट्रिगर?

सेमाग्लूटाइड की मौजूदा कीमत के आधार पर इस पर एक महीने की डोज पर होने वाला खर्च 8,000-16,000 रुपए के आसपास होता है। वहीं, इसके जेनरिक वर्जन के लॉन्च होने के बाद यह खर्च घट कर 3,000-5,000 रुपए पर आ सकता है। कीमतों में शुरुआती गिरावट 50–70% रह सकती है। वहीं, बाद में इस खर्च में 90 % तक गिरावट हो सकती है। नैटको ने अपने ब्रांड ‘सेमनैट’(Semnat)और ‘सेमाफुल’ (Semaful)के तहत सबसे कम डोज (2 mg) के लिए 1,290 रुपए प्रति माह की कीमत तय की है। वहीं, एरिस लाइफसाइंसेज भी ‘संडे’(Sundae) ब्रांड नाम से इसी किफ़ायती दर पर दवा उपलब्ध कराएगी।

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भारतीय कंपनियों की तैयारी: बड़े करार

ज़ाइडस लाइफसाइंसेज और ल्यूपिन ने सेमाग्लूटाइड की को-मार्केटिंग और सप्लाई के लिए करार किया है। एरिस लाइफसाइंसेज और नैटको फार्मा ने भी इसके लिए करार किया है। इसके अलावा नोवो नॉर्डिस्क और एमक्योर के साथ ही एली लिली और सिप्ला ने भी इस दवा की लॉन्चिंग के लिए करार किया है।

डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज़, ज़ाइडस लाइफसाइंसेज़ और नैटको फार्मा इस दवा को लॉन्च करने के लिए तैयार हैं। वहीं, मैनकाइंड फार्मा, सिप्ला और टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स आगे इस दवा को लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही हैं।

 

 

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