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कृषि कर्ज माफी स्कीम का सरकारी बैंकों की सेहत पर पड़ता है बहुत खराब असर, जानिए कैसे

अक्सर चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों के नेता वोटर्स को लुभाने के लिए कृषि कर्ज माफ करने का वादा करते हैं। ऐसे ऐलान बैंकों खासकर सरकार बैंकों की वित्तीय सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। किसान कर्ज माफ होने की उम्मीद में बैंकों को किस्त चुकाना बंद कर देते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 12, 2024 पर 3:04 PM
कृषि कर्ज माफी स्कीम का सरकारी बैंकों की सेहत पर पड़ता है बहुत खराब असर, जानिए कैसे
इस साल जून में तेलंगाना सरकार ने 31,000 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज माफ करने का ऐलान किया। इस स्कीम के तहत राज्य के किसानों के 2 लाख रुपये तक के लोन माफ हो जाएंगे।

चुनावों से पहले कई राजनीतिक दल और उनके नेता वोटर्स को लुभाने के लिए कृषि कर्ज माफ करने का वादा करते हैं। राजनीतिक दलों के इसे वादे का किसानों पर सीधा असर पड़ता है। कई बार यह वादा करने वाला राजनीतिक दल सत्ता में आने में नाकाम रहता है, लेकिन इस ऐलान से वह काफी बड़ा नुकसान कर देता है। दरअसल, इस तरह के ऐलान के बाद ऐसे किसान भी लोन की किस्त चुकाना बंद कर देते हैं, जो पहले नियमित रूप से चुका रहे थे। दरअसल, उन्हें लगता है कि अब उनका लोन माफ हो जाएगा। इसका बहुत खराब असर बैंकों खासकर सरकारी बैकों की सेहत पर पड़ता है।

कृषि कर्ज माफी स्कीम से किसानों को नुकसान

खास बात यह है कि इस ऐलान का असर सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं होता। पड़ोसी राज्यों के किसान भी लोन माफ करने की मांग शुरू कर देते हैं। सच यह है कि लोन माफी से किसान को लंबी अवधि में फायदा नहीं होता है। लेकिन, शॉर्ट टर्म में इसका असर पड़ता है। जब वह भविष्य में लोन के लिए बैंक की ब्रांच में जाता है तो मैनेजर उसे लोन देने में दिलचस्पी नहीं दिखाता। यह भी समझने की जरूरत है कि छोटे और भूमिहीन किसानों को लोन माफी का कोई फायदा नहीं होता है।

बैंकों की वित्तीय सेहत पर बड़ी चोट

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