चुनावों से पहले कई राजनीतिक दल और उनके नेता वोटर्स को लुभाने के लिए कृषि कर्ज माफ करने का वादा करते हैं। राजनीतिक दलों के इसे वादे का किसानों पर सीधा असर पड़ता है। कई बार यह वादा करने वाला राजनीतिक दल सत्ता में आने में नाकाम रहता है, लेकिन इस ऐलान से वह काफी बड़ा नुकसान कर देता है। दरअसल, इस तरह के ऐलान के बाद ऐसे किसान भी लोन की किस्त चुकाना बंद कर देते हैं, जो पहले नियमित रूप से चुका रहे थे। दरअसल, उन्हें लगता है कि अब उनका लोन माफ हो जाएगा। इसका बहुत खराब असर बैंकों खासकर सरकारी बैकों की सेहत पर पड़ता है।
