2 जून को सरकारी बैंकों के शेयरों में 7 प्रतिशत तक की तेजी है। इसके पीछे अहम वजह विशेषज्ञों की ओर से जताई गई यह उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की जून महीने की मीटिंग में रेपो रेट में लगातार तीसरी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती हो सकती है। यह मीटिंग 4 जून को होने वाली है और नतीजे 6 जून को सामने आएंगे। इसके अलावा देश के ताजा जीडीपी आंकड़ों के चलते कर्ज की मांग मजबूत होने की उम्मीद है। इसने भी शेयरों में तेजी को बढ़ावा दिया है। देश की आर्थिक वृद्धि दर जनवरी-मार्च 2025 तिमाही में 7.4 प्रतिशत रही। यह पिछली 4 तिमाहियों का हाई है। पूरे वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रही।
सरकारी बैंकों के शेयरों की कीमतों में तेज उछाल ने निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स को 2 प्रतिशत ऊपर धकेल दिया। इंडेक्स ने लगातार दूसरे सत्र में बढ़त हासिल की है। इंडेक्स पर लिस्टेड बैंकों में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शेयर में सबसे ज्यादा 6.6 प्रतिशत की तेजी दिखी। शेयर की कीमत 58 रुपये के हाई तक चली गई। बाद में यह 57.55 रुपये पर बंद हुआ। इस शेयर पर कवरेज करने वाले एनालिस्ट ने शेयर के लिए "बाय" रेटिंग दी है। साथ ही 62 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है।
IOB का शेयर 6 प्रतिशत उछला
इसके बाद इंडियन ओवरसीज बैंक का शेयर 6 प्रतिशत चढ़ा और 42.25 रुपये पर बंद हुआ। इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयर 4-4 प्रतिशत मजबूत हुए और क्रमश: 643.90, 40.53, 153.15 रुपये पर बंद हुए। पंजाब एंड सिंध बैंक के शेयर 3.6 प्रतिशत चढ़कर 33.16 और यूको बैंक शेयर 3.5 प्रतिशत उछलकर 34.22 रुपये पर बंद हुए। अन्य पीएसयू बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया का शेयर 2.7 प्रतिशत चढ़ा। वहीं पंजाब नेशनल बैंक के शेयर में 2.5 प्रतिशत और बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर 2.2 प्रतिशत की तेजी रही। केनरा बैंक का शेयर लगभग 2 प्रतिशत उछला, वहीं भारतीय स्टेट बैंक के शेयर ने 0.15 प्रतिशत की तेजी देखी। SBI के शेयर के लिए ICICI Securities ने 'बाय' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस 950 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।
RBI का 'एकोमोडेटिव' रुख रह सकता है बरकरार
बार्कलेज इंडिया ने कहा कि उसे उम्मीद है कि RBI बेंचमार्क दरों में कटौती करेगा और 'एकोमोडेटिव' रुख को बरकरार रखेगा। 6 जून को रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती हो सकती है। जेएम फाइनेंशियल का कहना है कि वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे ऊपर उठ रही है। निवेश और सरकारी खपत इसके मुख्य ड्राइवर रहे हैं, जबकि निजी खपत में कमी आई है।
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