Elara report on Q-Commerce : रैपिडो की फूड डिलिवरी बिजनेस में एंट्री, जोमैटो और स्विगी पर क्या होगा असर?

Elara report on Q-Commerce : रैपिडो के लिए जोमैटो और स्विगी की चुनौती पर बात करते हुए एलारा कैपिटल की इस रिपोर्ट में कहा गया है। फूड डिलीवरी की सालाना ग्रोथ 40 फीसदी से घटकर 15–16 फीसदी पर आ गई है। फूड डिलीवरी में तेजी से विस्तार मुश्किल काम है

अपडेटेड Jun 10, 2025 पर 2:38 PM
एलारा का कहना है कि Q-कॉमर्स पर सख्ती से भी रैपिडो के लिए परेशानी हो सकती है। हाल में Q-कॉमर्स कंपनियों पर FDA की सख्ती बढ़ी है

Elara report on Q-Commerce : रैपिडो (Rapido) ने फूड डिलिवरी बिजनेस में एंट्री का ऐलान किया है। जोमैटो ( Zomato) और स्विगी (Swiggy) पहले से फूड डिलिवरी बिजनेस में हैं। ऐसे में रैपिडो के सामने चुनौती क्या होगी और इसका जोमैटो और स्विगी पर इसका क्या असर होगा, इस पर एलारा ने एक रिपोर्ट निकाली है। रैपिडो के लिए चुनौती पर एलारा की रिपोर्ट में कहा गया है कि रैपिडो की फूड डिलिवरी बिजनेस में एंट्री की खबर तो आई है रैपिडो के फूड डिलीवरी के लिए फ्लीट तय नहीं है। कंपनी थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स पर निर्भर होगी। इससे डिलीवरी क्वालिटी पर उसका कंट्रोल नहीं हो।

इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि रैपिडो का कमीशन कम है। यह 8–15 फीसदी ही है। इससे उसको जोमैटो और स्विगी के मुकाबले प्रति ऑर्डर कम रेवेन्यू मिलेगी। तेज विस्तार से ऑपरेशन संतुलन बिगड़ सकता है। जोमैटो और स्विगी जैसे मजबूत फूड ब्रान्ड से उसका मुकाबला है।

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जोमैटो और स्विगी की चुनौती

रैपिडो के लिए जोमैटो और स्विगी की चुनौती पर बात करते हुए एलारा कैपिटल की इस रिपोर्ट में कहा गया है। फूड डिलीवरी की सालाना ग्रोथ 40 फीसदी से घटकर 15–16 फीसदी पर आ गई है। फूड डिलीवरी में तेजी से विस्तार मुश्किल काम है। जोमैटो के ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू में 10 फीसदी की कटौती संभव है। कंपनी के लिए ऑर्डर या एवरेज ऑर्डर वैल्यू बढ़ाना आसान नहीं है। बिना कीमत बढ़ाए मुनाफा बढ़ना मुश्किल है। 30 मिनट डिलीवरी और लॉजिस्टिक कॉस्ट से मार्जिन पर असर पड़ेगा।

Q-कॉमर्स पर सख्ती

एलारा का कहना है कि Q-कॉमर्स पर सख्ती से भी रैपिडो के लिए परेशानी हो सकती है। हाल में Q-कॉमर्स कंपनियों पर FDA की सख्ती बढ़ी है। Zepto और Blinkit के कुछ डार्क स्टोर पर कार्रवाई हुई है। कंपनी के सामने क्वालिटी कंट्रोल और कंपिटीशन से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। प्राइसिंग में डार्क पैटर्न से चुनौतियां बढ़ीं। 2026 तक जेप्टो का IPO टलने से भी झटका लगा है।

 

 

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