भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 22 मई को केंद्र सरकार के लिए डिविडेंड का ऐलान कर दिया। केंद्रीय बैंक ने केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.86 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया है। यह पिछले साल के डिविडेंड से करीब 7 फीसदी ज्यादा है। हालांकि, सरकार को 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डिविडेंड की उम्मीद थी।
1. वेल्फेयर स्कीम पर सरकार ज्यादा खर्च कर सकेगी
आरबीआई से मिला डिविडेंड सरकार के नॉन-टैक्स रेवेन्यू का हिस्सा है। ज्यादा डिविडेंड मिलने से सरकार के हाथ में वेल्फेयर स्कीम पर खर्च करने के लिए पर्याप्त पैसे होंगे। खासकर ऐसे वक्त में यह बहुत अहम है, जब क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ा है।
सरकार ने इस वित्त वर्ष में कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया है। आरबीआई के डिविडेंड से सरकार को कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट पूरा करने में आसानी होगी। इसका मतलब है कि सरकार सड़क, रेलवे, मेट्रो जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा पैसे खर्च करेगी। इससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे।
3. सरकार को बाजार से कम कर्ज लेना पड़ेगा
सरकार का खर्च उसकी इनकम से ज्यादा रहता है। इस वजह से हर वित्त वर्ष में सरकार को उधार लेना पड़ता है। इनकम और खर्च का अंतर जितना ज्यादा रहता है, सरकार को उतना ज्यादा उधार लेना पड़ता है। सरकार के ज्यादा उधार लेने का असर इंटरेस्ट रेट पर पड़ता है। इससे लोन महंगा हो जाता है। इसका असर न सिर्फ कंपनियों पर पड़ता है बल्कि आम आदमी को भी होम लोन और कार लोन के लिए ज्यााद इंटरेस्ट चुकाना पड़ता है।
4. शेयर बाजार का सेंटीमेंट बेहतर होगा
आरबीआई ने डिविडेंड का ऐलान शेयर बाजार बंद होने के बाद किया। इस डिविडेंड का असर 25 मई को शेयर बाजार पर दिखेगा। पिछले साल डिविडेंड के ऐलान के बाद शेयर बाजार में तेजी आई थी। इस बार भी बाजार पर इसका पॉजिटिव असर पड़ने की उम्मीद है। यह पहले से दबाव में चल रहे शेयर बाजार के लिए संजीवनी जैसा होगा। इससे शेयरों की कीमतों में तेजी आएगी, जिससे रिटेल इनवेस्टर्स को राहत मिलेगी।