सेंसेक्स 75000 अंक के करीब है। यह सितंबर 2024 के अपने 85,900 के रिकॉर्ड हाई से करीब 10,000 अंक नीचे आ चुका है। बीते डेढ़ साल में बाजार में आई गिरावट ने कई इनवेस्टर्स का धैर्य तोड़ा है। गिरावट बढ़ने के डर से वे बाजार से अपने पैसे निकाल चुके हैं। कई इनवेस्टर्स अब भी बाजार में टिके हुए हैं। सवाल है कि क्या जो इनवेस्टर्स आज भी टिके हुए हैं क्या बाजार उन्हें इसका इनाम देगा?
बाजार में टिके रहने वाले निवेशकों को इनाम मिला है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार ने हमेशा गिरावट के दौरान टिके रहने वाले निवेशकों को इनाम दिया है। वेल्थविशर फाइनेंशियल प्लैनर्स के फाउंडर एवं सेबी रिजस्टर्ड एडवाइजर मधुपम कृष्णा ने कहा, " बीते कई दशकों में बाजार में तीन बार बड़ी गिरावट आई है। सबसे पहले 1992 में हर्षद मेहता स्कैम के वक्त मार्केट क्रैश कर गया था। उसके बाद 2008 में फाइनेंशियल क्राइसिस की वजह से मार्केट में बड़ी गिरावट आई थी। आखिर में कोविड की महामारी आने पर मार्च 2020 में क्रैश कर गया था। "
हर बार बड़ी गिरावट के बाद आई है रिकवरी
उन्होंने कहा कि तीनों बार गिरावट के बाद मार्केट में रिकवरी आई। हालांकि, रिकवरी में लगने वाला समय अलग-अलग रहा। कभी छह महीने के अंदर मार्केट रिकवर कर गया तो कभी दो से 4 साल का समय लगा। उन्होंने कहा कि अगर सेंसेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे आ गया है तो इसका मतलब यह नहीं कि लंबी अवधि के निवेशकों का रिटर्न घट जाएगा।
रिकवरी आने पर बाजार में होती है कमाई
कृष्णा ने कहा कि इतिहास बताता है कि असल मुनाफा तब होता है, जब मार्केट बड़ी गिरावट के बाद रिकवर करता है। इसका फायदा उन निवेशकों को मिलता है जो बाजार में टिके रहते हैं। अभी बाजार पर दबाव बढ़ने के कई कारण हैं। इनमें अमेरिका-ईरान में टकराव, क्रूड में उछाल, विदेशी फंडों की बिकवाली और कंपनियों की कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ शामिल हैं।
कई इनवेस्टर्स रिकवरी का फायदा उठाने का मौका चूक जाते हैं
ग्रीन पोर्टफोलियो के सीआईओ अनुज जैन ने कहा, "अर्निंग्स ग्रोथ बढ़ने पर बाजार का सेंटीमेंट बेहतर होगा। इससे शेयरों की रीरेटिंग होगी।" इसका फायदा उन इनवेस्टर्स को मिलता है, जो बाजार में टिके रहते हैं। इसकी वजह यह है कि जो इनवेस्टर्स एक बार बाजार से निकल जाते हैं, उन्हें यह पता नहीं होता है कि दोबारा बाजार में एंट्र्री का सही वक्त क्या है। वे दोबारा निवेश के लिए सही वक्त का इंतजार करते रह जाते हैं। इस बीच शेयरों की कीमतें उनके अनुमान से ऊपर चली जाती है। इसका मतलब है कि वे बाजार में आई तेजी का फायदा उठाने का मौका चूक जाते हैं।
इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर असर नहीं
बाजार के जानकारों का कहना है कि अभी बाजार के लिए कई चैलेंजेज दिख रहे हैं। लेकिन, इनका इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर कोई असर नहीं पड़ा है। हालात बदलते ही शेयर बाजार में रिकवरी शुरू हो सकती है। अब भी इंडिया की ग्रोथ दुनिया की बड़ी इकोनॉमीज में सबसे ज्यादा है। घरेलू मांग स्ट्रॉन्ग बनी हुई है। सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए बड़ा टारगेट तय किया है। इसका इकोनॉमी पर अच्छा असर पड़ेगा।