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RBI ने बड़े बैंकों को माइक्रोफाइनेंस लोन पर रिस्क वेटेज बढ़ाने को कहा, जानिए क्या है इसका मतलब

RBI ने कम से कम पांच बड़े बैंकों को माइक्रोफाइनेंस लोन पर रिस्क वेटेज बढ़ाने को कहा है। उन्हें अब 75 फीसदी की जगह 125 फीसदी रिस्क वेटेज करना होगा। अनुमान है कि केंद्रीय बैंक आगे बाकी बैंकों को भी माइक्रोफाइनेंस लोन पर रिस्क वेटेज बढ़ाने को कह सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 14, 2024 पर 11:14 AM
RBI ने बड़े बैंकों को माइक्रोफाइनेंस लोन पर रिस्क वेटेज बढ़ाने को कहा, जानिए क्या है इसका मतलब
RBI ने बैंकों को माइक्रोफाइनेंस लोन को अनसेक्योर्ड लोन मानने को कहा है।

कुछ बड़े प्राइवेट बैंकों ने बीते 10 दिनों में माइक्रोफाइनेंस लोन पर अपना रिस्क वेटेज बढ़ा दिया है। इसकी वजह आरबीआई का एक निर्देश है। मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी। केंद्रीय बैंक ने हाल में कम से कम पांच बड़े बैंकों को निर्देश दिया है। इसमें उन्हें माइक्रोफाइनेंस लोन पर रिस्क वेटेज 75 फीसदी से बढ़ाकर 125 फीसदी करने को कहा गया है। माइक्रोफाइनेंस लोन को अनसेक्योर्ड लोन मानने को कहा गया है। इस मामले से जुड़े एक सीनियर अफसर ने बताया कि इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

बैंकों पर क्या पड़ेगा असर?

माइक्रोफाइनेंस लोन (Microfinance Loan) पर रिस्क वेटेज (Risk Weightage) बढ़ाने का मतलब है कि बैंकों को लोन पर संभावित लॉस के लिए अब ज्यादा कैपिटल अलग करना होगा। इसका असर उनकी अर्निंग्स पर पड़ेगा। इससे माइक्रोफाइनेंस लोन अब हाई-रिस्क कैटेगरी में आ गए हैं। हाई-रिस्क कैटेगरी में अनसेक्योर्ड लोन भी आते हैं। एफोर्डेबल हाउसिंग जैसे लोन लो-रिस्क कैटेगरी में आते हैं। ऐसे लोन पर रिस्क वेटेज सिर्फ 35 फीसदी है।

RBI ने क्यों उठाया यह कदम?

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