आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक 4 फरवरी को शुरू हो गई। इसके नतीजे 6 फरवरी को आएंगे। 6 फरवरी को सुबह 10 बजे आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा एमपीसी के फैसलों के बारे में बताएंगे। पिछले साल आरबीआई ने फरवरी में इंटरेस्ट रेट में कमी करने का सिलसिला शुरू किया था। उसने 2025 में रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट्स यानी 1.25 फीसदी की कमी की। सवाल है कि क्या 6 फरवरी को इंटरेस्ट रेट घटाएगा?
मनीकंट्रोल के पोल के रिजल्ट्स क्या कहते हैं?
यह 2026 की आरबीआई की पहली मॉनेटरी पॉलिसी होगा। केंद्रीय बैंक हर दो महीने पर मॉनेटरी पॉलिसी पेश करता है। मनीकंट्रोल ने 6 फरवरी को RBI की एमपीसी के संभावित नतीजों के बारे में जानने के लिए एक पोल किया। इसमें 19 इकोनॉमिस्ट्स, ट्रेजरी हेड्स और मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने हिस्सा लिया। इनमें से ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। आरबीआई ने दिसंबर 2025 की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कमी की थी।
RBI की एमपीसी का फैसला क्या होगा?
कोटक महिंद्रा एएमसी के सीआईओ (डेट) दीपक अग्रवाल ने कहा, "अभी स्थितियां पॉलिसी में स्टैबिलिटी के लिए अनुकूल हैं। इनफ्लेशन आरबीआई के टारगेट से नीचे है। ग्रोथ की रफ्तार अच्छी है। सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी है और फिस्कल कंसॉलिडेशन पर सरकार का फोकस बने रहने की पुष्टि हो गई है।" उन्होंने कहा कि एमपीसी रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित बनाए रखने का फैसला कर सकती है।
RBI ने 2025 में इंटरेस्ट रेट कुल कितना घटाया है?
इंडस्ट्री से जुड़े कई दूसरे लोगों का भी मानना है कि एमपीसी की पॉलिसी सपोर्टिव बनी रहेगी। रेपो रेट में किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है। गोल्डन ग्रोथ फंड (GGF) के सीईओ अंकुर जालान ने कहा, "फरवरी 2025 से आरबीआई रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर चुका है। बैंक धीरे-धीरे डिपॉजिट्स रेट्स घटा रहे हैं। रियल एस्टेट फोकस्ड कैटेगरी II AIF (अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड) के लिए निवेश का माहौल अनुकूल हो रहा है।"
RBI का फोकस मॉनेटरी पॉलिसी में किन बातों पर होगा?
मार्केट पार्टिसिपेंट्स का हालांकि मानना है कि आरबीआई की पॉलिसी का फोकस अब इंटरेस्ट रेट्स की जगह लिक्विडिटी की स्थितियों और फाइनेंशियल ट्रांसमिशन पर बढ़ रहा है। अर्थ भारत इनवेस्टमेंट मैनेजर्स आईएफएससी एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर सचिन सावरिकर ने कहा, "आरबीआई की एमपीसी की इस मीटिंग पर मार्केट्स की करीबी नजरें होंगी। मार्केट्स लिक्विडिटी को लेकर आरबीआई के रुख के बारे में जानना चाहता है। खासकर तब जब सरकार की बॉरोइंग हाई बनी हुई है और फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स लगातार बिकवाली कर रहे हैं।"
क्या मॉनेटरी पॉलिसी में आरबीआई का रुख न्यूट्रल बना रहेगा?
कई इकोनॉमिस्ट्स और फंड मैनेजर्स का मानना है कि आरबीआई इंटरेस्ट रेट में कमी के आखिरी चरण में पहुंच गया है। सावरिकर ने कहा, "ग्रोथ और इनफ्लेशन को लेकर कोई चिंता नहीं है, जिससे आरबीआई के इंटरेस्ट रेट को अपरिवर्तित रखने की उम्मीद है। आरबीआई का रुख न्यूट्रल बने रहने की भी उम्मीद है, क्योंकि केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर और एक बार इंटरेस्ट रेट में कमी का विकल्प खुला रखना चाहेगा।"