नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) के रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 13 करोड़ के पार पहुंच गई है। यह आंकड़ा दिखाता है कि पूंजी बाजारों में खुदरा निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। एक्सचेंज ने बताया कि यह उपलब्धि 27 अप्रैल को हासिल हुई। इससे पहले सितंबर 2025 में NSE पर रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या ने 12 करोड़ का आंकड़ा पार किया था। 25 अप्रैल 2026 तक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड कुल क्लाइंट कोड 25.7 करोड़ थे।
इनमें ट्रेडिंग सदस्यों के साथ खोले गए सभी खाते शामिल हैं। निवेशकों को एक से ज्यादा खाते रखने की अनुमति होती है। NSE ने बताया कि पिछले कुछ सालों में निवेशकों की संख्या में बढ़ोतरी की रफ्तार काफी तेज हुई है। एक्सचेंज को अपने पहले एक करोड़ निवेशकों तक पहुंचने में 14 साल लगे थे। उसके बाद 3 करोड़ और निवेशक जोड़ने में 11 साल लगे। हालांकि, हाल के सालों में 1 करोड़ निवेशक जोड़ने में औसतन लगभग 6-8 महीने ही लग रहे हैं।
5 साल में निवेशकों की संख्या 26.4 प्रतिशत CAGR से बढ़ी
वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2026 तक के दौरान यानि कि 5 साल में निवेशकों की संख्या 26.4 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ी। इससे पहले के 5 सालों के दौरान यह दर 15.2 प्रतिशत थी। एक बयान में एक्सचेंज ने इस बढ़ोतरी का श्रेय डिजिटल पहुंच बढ़ने, निवेशकों में बढ़ती जागरूकता, और नियामकों व मार्केट इंफ्राट्रक्चर से जुड़ी एंटिटीज द्वारा पूंजी बाजारों को और अधिक समावेशी बनाने के प्रयासों को दिया है। इसी अवधि के दौरान NSE पर लिस्टेड कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 18 प्रतिशत की CAGR से बढ़कर 460.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं दिसंबर 2025 तक व्यक्तिगत निवेशकों की बाजार में हिस्सेदारी (सीधे तौर पर या म्यूचुअल फंड के जरिए) 18.6 प्रतिशत थी।
अब देश के 99.85 प्रतिशत पिन कोड में निवेशक मौजूद
एक्सचेंज ने निवेशकों की जनसांख्यिकी में आए बदलावों पर भी रोशनी डाली। इसके अनुसार, निवेशकों की औसत आयु (मीडियन एज) घटकर लगभग 33 साल रह गई है। वित्त वर्ष 2021 में यह 36 साल थी। लगभग 40 प्रतिशत निवेशक 30 साल से कम उम्र के हैं, जबकि हर 4 में से एक निवेशक महिला है। भौगोलिक रूप से निवेशकों की भागीदारी का दायरा बढ़ा है। अब देश के 99.85 प्रतिशत पिन कोड में निवेशक मौजूद हैं। महाराष्ट्र लगभग 2 करोड़ निवेशकों के साथ सबसे आगे है, उसके बाद उत्तर प्रदेश 1.5 करोड़ और गुजरात 1.1 करोड़ निवेशकों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। टॉप 10 राज्यों से बाहर के राज्यों की हिस्सेदारी कुल इनवेस्टर बेस में 27 प्रतिशत है।
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