NSE Unlisted Shares: अनलिस्टेड मार्केट में NSE के शेयरों की तगड़ी डिमांड, कीमतों में भी बड़ा उछाल
NSE Unlisted Shares: NSE के IPO को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने अनलिस्टेड शेयरों में रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी कई गुना बढ़ा दी है। नए निवेशकों के साथ शेयर की कीमतों में भी तगड़ा उछाल आया है। जानिए पूरी डिटेल।
NSE के अनलिस्टेड शेयरों की कीमत पिछले चार साल में 140% बढ़ चुकी है।
NSE Unlisted Shares: अनलिस्टेड मार्केट में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। खासकर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयरों की तगड़ी डिमांड है। NSE के लंबे समय से अटके आईपीओ को लेकर बढ़ी है, जिसके चलते रिटेल इन्वेस्टर्स तेजी से अनलिस्टेड शेयर खरीद रहे हैं। सिर्फ तीन महीने में 1 लाख से ज्यादा निवेशक NSE के शेयर खरीद चुके हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रे मार्केट के इतिहास में यह सबसे बड़ी खरीदारी में से एक है।
खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी में रिकॉर्ड उछाल
मार्च 2025 में NSE के खुदरा शेयरधारकों की संख्या 33,896 थी, जो जून 2025 में बढ़कर 1,46,208 हो गई। यानी यह आंकड़ा चार गुना से ज्यादा बढ़ा। अब 2 लाख रुपये तक की वैल्यू वाले शेयर रखने वाले रेजिडेंट इंडिविजुअल निवेशकों की हिस्सेदारी 9.89% से बढ़कर 11.81% हो गई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह तेजी प्री-आईपीओ मार्केट में रिटेल इन्वेस्टर्स की बढ़ती मौजूदगी को दिखाती है।
शेयर की कीमतों में जबरदस्त उछाल
NSE के अनलिस्टेड शेयरों की कीमत पिछले चार साल में 140% बढ़ चुकी है। 2021 में यह कीमत लगभग 740 रुपये थी, जो मई 2025 में 1,775 रुपये हो गई। सिर्फ मई के एक हफ्ते में ही शेयर की कीमत 1,800 रुपये से बढ़कर 2,300 रुपये हो गई। इसका कारण ग्रे मार्केट में शेयरों की कमी और आईपीओ को लेकर बढ़ती अटकलें हैं।
NSE का IPO कब तक आएगा?
NSE का बहुप्रतीक्षित आईपीओ पिछले आठ साल से अटका है। ET NOW को दिए एक इंटरव्यू में NSE के एमडी और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने कहा, "हम NSE IPO के लिए सेबी (SEBI) से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) का इंतजार कर रहे हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि एनओसी मिलने के बाद एक्सचेंज अपने शेयरों को बीएसई लिमिटेड (BSE Ltd.) पर लिस्ट कराने की योजना बनाएगा।
वहीं, सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने जून 2025 में कहा था कि NSE रे आईपीओ की राह में अब कोई बाधा नहीं है, लेकिन उन्होंने समयसीमा बताने से इनकार मना कर दिया था।
NSE के IPO में देरी की वजह क्या है?
पहले सेबी ने कुछ अनसुलझे मामलों के कारण NOC रोका था। इसमें तकनीकी गड़बड़ियां, कानूनी केस और NSE क्लीयरिंग में NSE की हिस्सेदारी कम करने जैसे मुद्दे शामिल थे।
इन मामलों को सुलझाने के लिए NSE ने 1,388 करोड़ रुपये देने की पेशकश की है। इसमें 1,165 करोड़ रुपये को-लोकेशन केस और 223 करोड़ रुपये डार्क फाइबर मामले से जुड़े हैं। यह जानकारी इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में दी गई है।
NSE के अनलिस्टेड शेयर कैसे खरीदें
खुदरा निवेशक NSE के अनलिस्टेड शेयरों को नीचे दिए माध्यमों से खरीद सकते हैं। शेयर खरीदने से पहले पैन और आधार के जरिए KYC प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है।
प्री-आईपीओ सिक्योरिटीज में विशेषज्ञ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियां
प्राइवेट मार्केट ट्रांजैक्शन की सुविधा देने वाले वेल्थटेक स्टार्टअप्स
निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान
अनलिस्टेड मार्केट में कोई भी स्टॉक खरीदने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। नहीं तो आप गहरी मुश्किल में फंस सकते हैं।
ये शेयर पब्लिक स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते और इनमें लिक्विडिटी कम होती है।
कीमतें अक्सर निवेशक भावनाओं पर आधारित होती हैं, न कि कंपनी के मूल आधार पर।
इस मार्केट पर रेगुलेशन सीमित है, इसलिए निवेश से पहले निवेशक को पूरी रिसर्च करनी चाहिए।
बाजार के जानकार मानते हैं कि NSE के IPO का रास्ता साफ होने के बाद निवेशकों की दिलचस्पी और भी बढ़ सकती है, लेकिन तब तक इस जोखिम भरे बाजार में समझदारी से कदम रखना होगा।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।