रशिया -यूक्रेन युद्ध के चलते कच्चे तेल और दूसरी कमोडिटी की कीमतों में उबाल आता दिखा है। दुनिया भर में सप्लाई चेन की दिक्कतें पैदा हो गई हैं जिसके चलते ग्लोबल स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। इस बीच अगले हफ्ते यूएस फेड और बैंक ऑफ जापान की पॉलिसी मीट होने वाली है। यह तो पक्का है कि यूएस फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीतियों में नरमी कायम रखेगा।
रूस -यूक्रेन युद्ध के चलते आसमान पर महंगाई
अमेरिका में महंगाई 40 साल के शिखर पर पहुंच गई है। फरवरी महीनों में खुदरा महंगाई ने सालाना आधार पर 7.9 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है जो पिछले 40 साल की सबसे बड़ी सालाना ग्रोथ है। 1982 के बाद पहली बार अमेरिका में महंगाई में सालाना आधार पर इतनी बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
अमेरिकी प्रेसिडेंट द्वारा रूसी तेल इंपोर्ट पर हाल में लगाए गए प्रतिबंध से यूएस एनर्जी प्राइसेस में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। बता दें कि रूस दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल और गैस निर्यातकों में से एक है।
FOMC मीट के पहले क्या है बाजार को उम्मीद
मार्केट एनालिस्ट को उम्मीद है कि 16 मार्च को होने वाली यूएस फेड की मीट से ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर शुरु हो जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस साल हमें ब्याज दरों में 7 बार बढ़ोतरी होती नजर आ सकती है। जानकारों का यह भी अनुमान है कि अगले हफ्ते होने वाली पॉलिसी मीट में यूएस फेड ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है।
युक्रेन रूस युद्ध का फैलाव बाजार के लिए सबसे बड़ा डर
CNBC TV-18 को दिए गए एक इंटरव्यू में जाने माने मार्केट एक्सपर्ट्स स्टीव इंग्लैंडर (Steve Englander) ने कहा है कि बाजार के लिए महंगाई एक बड़ी चिंता है। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई अब इस स्तर पर पहुंच गई है जहां से अब इसके और बढ़ने की संभावना नहीं है। इस पूरी तेजी के दौरान यूएस डॉलर सबसे ज्यादा सुरक्षित और स्थिर प्रदर्शन करने वाला रहा है। बाजार के लिए सबसे बड़ा डर यही है कि यूक्रेन और रूस की लड़ाई और ज्यादा गंभीर होती जा रही और इसके साथ ही इस लड़ाई के इन दोनों देशों की सीमाओं के बाहर फैलने का डर पैदा हो गया है। अगर ऐसा होता है तो यह बाजार के लिए बहुत दुर्यभाग्यपूर्ण होगा।
इसी तरह एक दूसरे इकोनॉमिस्ट तैमूर बेग (Taimur Baig) ने CNBC TV-18 के साथ हुई बातचीत में कहा है कि दुनिया भर में बढ़ती महंगाई के दबाव से भारत भी सुरक्षित नहीं है। हालांकि भारत इस महंगाई से निपटने के लिए तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास इस समय मुद्रा स्थिति से निपटने के लिए 2013 की तुलना में ज्यादा माल-असबाब है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें नियर टर्म में तय कर सकती है बाजार की दिशा और दशा
Kotak Securities के श्रीकांत चौहान का कहना है कि एनर्जी की कीमतों में बढ़ोतरी और देश के मैक्रो इकोनॉमिक मानकों पर इसका असर नियर टर्म में बाजार की दशा और दिशा तय करने में महत्तवपूर्ण भूमिका अदा करेगा। उन्होंने आगे कहा कि लगातार बनी हुई उच्च स्तरीय महंगाई के बीच बाजार की नजर अगले हफ्ते होने वाले यूएस फेड की बैठकों के एलानों पर लगी रहेगी।