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रोलओवर के डेटा के आधार पर मीडियम टर्म का नजरिया बना सकते हैं, जानिए कैसे

महीने के अंत में एक्सपायरी के रोलओवर के डेटा से कई संकेत मिलते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि स्टॉक्स और सूचकांकों की आगे की एक्सपायरी को लेकर किस तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। इससे ट्रेड को लेकर मीडियम टर्म व्यू बनाने में मदद मिलती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 30, 2024 पर 2:31 PM
रोलओवर के डेटा के आधार पर मीडियम टर्म का नजरिया बना सकते हैं, जानिए कैसे
रोलओवर के कैलकुलेशन के लिए ओपन इंटरेस्ट का डेटा एनएसई की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

नवंबर एक्सपायरी डे को बड़ी गिरावट देखने को मिली। महीने के अंत में एक्सपायरी के रोलओवर के डेटा से कई संकेत मिलते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि स्टॉक्स और सूचकांकों की आगे की एक्सपायरी को लेकर किस तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। कई ट्रेडर्स कुछ दिनों के लिए ट्रेड लेते हैं। हालांकि, एक्सपायरी अहम है, लेकिन यह ट्रेडर्स को तब भी ट्रेड लेने से नहीं रोकता है जब पोजीशन एक्सपायरी डे के पहले लिया जाता है और जिसके एक्सपायरी डे के बाद क्लोज हो जाने की संभावना होती है।

क्या है रोलओवर?

रोलओवर का फीसदी यह बताता है कि आगे इस तरह के कितने रोलओवर्स होने हैं। एक सिंपल कैलकुलेशन की मदद से रोलओवर के बारे मे जानकारी हासिल की जा सकती है। रोलओवर पर्सेंटेज = करेंट छोड़कर सभी एक्सपायरीज का ओपन इंट्रेस्ट/टोटल ओपन इंटरेस्ट (फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट का) । हम जानते हैं कि फ्यूचर्स के ट्रेड डेटा हमें किसी डायरेक्शनल मूव में पार्टिसिपेशन की पहचान करने में मदद करते हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है तो कौन सा मूव दूसरे मूव से स्ट्रॉन्ग है।

अगर कोई स्टॉक 10 फीसदी चढ़ता है और ओपन इंटरेस्ट 25 फीसदी बढ़ जाता है तो इससे यह भरोसा पैदा होता है कि नए ओपन इंटरेस्ट (ट्रेडर्स) की तरफ से फ्यूचर्स की खरीदारी हुई है जिससे कीमतें चढ़ गई हैं। इससे हम यह उम्मीद लगा सकते हैं कि आम राय यह है कि स्टॉक/इंडेक्स चढ़ना चाहिए।

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