Ukraine War : क्रूड की कीमतों में उछाल सहित कई कारणों से रुपये पर दबाव बना हुआ है और यह जल्द ही अमेरिकी डॉलर की तुलना में 80 का स्तर भी तोड़ सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स के 14 ब्रोकरेज, बैंकों और ट्रेजरी डिपार्टमेंट्स के बीच किए गए पोल में यह बात सामने आई है। विकसित बाजारों में सेफ हैवन एसेट्स (safe-haven assets) की बढ़ती डिमांड से भी ऐसे ही संकेत मिलते हैं।
पोल के पार्टिसिपैंट्स ने कहा कि करेंसी मार्केट में अगले कुछ हफ्तों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जब तक यूक्रेन युद्ध (Ukraine war) एक राजनयिक समाधान तक नहीं पहुंच जाता।
भारत का एक्सटर्नल बैलेंस कमजोर
भारत का एक्सटर्नल बैलेंस कमजोर है और कमोडिटी की ऊंची कीमतों के चलते उसकी चिंताएं और बढ़ सकती हैं। सीआर फॉरेक्स के एमडी अमित पाबरी ने कहा, “पिछले एक महीने से जिस तरह के हालात उभरे हैं, इनके आसानी से शांत होने की उम्मीद नहीं है।”
उन्होंने कहा, सेंट्रल बैंक दखल दे सकता है लेकिन फंडामेंटल्स कमजोर होने से ट्रेडर्स डॉलर की तुलना में रुपये पर लंबा दांव नहीं लगाएंगे। एफपीआई (FPI) जोखिम भरे इमर्जिंग मार्केट्स में लगातार बिकवाली कर रहे हैं।
82 के स्तर तक गिर सकता है रुपया
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कैलेंडर वर्ष में रुपया 77.93 तक गिर सकता है। दो का अनुमान है कि रुपया इस साल प्रति डॉलर 80-82 की रेंज तक गिर सकता है। जेनिथ फिनकॉर्प के सीईओ सौरभ गोयनका ने कहा, “हम कैलेंडर वर्ष 2022 में रुपये को प्रति डॉलर 80 के स्तर तक गिरता देखते हैं।” उन्होंने कहा, फेड की तुलना में आरबीआई (RBI) ज्यादा नरम रुख रखते हुए सरकार के उधारी कार्यक्रम को सपोर्ट दे सकता है। उन्होंने कहा, “रुपये में कमजोरी से सिस्टम में लिक्विडिटी पैदा होती है और विदेशी निवेशक लोकल डेट मार्केट की ओर आकर्षित होते हैं।”
हालांकि, सीजंड ट्रेडर्स तुलनात्मक रूप से उतार-चढ़ाव के जल्दी खत्म होने की उम्मीद करते हैं।
जिओपॉलिटिकल रिस्क पड़ रहा भारी
आईएफए ग्लोबल के फाउंडर अभिषेक गोयनका ने कहा, “यदि जिओपॉलिटिकल रिस्क, क्रूड की महंगाई और फंड के आउटफ्लो से शॉर्ट टर्म में रुपया गिरता है तो यह पांच साल के औसत की ओर लौटने जा रहा है, जो लगभग 2.5 फीसदी है।”