अप्रैल की मॉनेटरी पॉलिसी के बाद आधा फीसदी मजबूत हो चुका है रुपया, क्या यह तेजी जारी रहेगी?

Rupee Vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 82.33 के लेवल तक चला गया था। लेकिन, 6 अप्रैल को आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी आने के बाद इसमें मजबूती देखने को मिली है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसमें इंडियन इकोनॉमी की मजबूत बुनियादी स्थिति का हाथ है

अपडेटेड Apr 17, 2023 पर 6:20 PM
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में ग्लोबल रिस्क के साथ ही गोल्ड और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का असर रुपये पर पड़ेगा।

डॉलर के मुकाबले रुपये (Dollar Vs Rupee) में मजबूती देखने को मिली है। डॉलर के मुकाबले यह 82.33 के लेवल तक चला गया था। तब से इसमें अच्छी मजबूती देखने को मिली है। सवाल है कि क्या इसमें मजबूती का रुख जारी रहेगा, क्या यह 81 से नीचे चला जाएगा? एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपया के डॉलर के मुकाबले 81 के लेवल से नीचे जाने की उम्मीद नहीं है। आपको बता दें कि रुपये की वैल्यू घटने पर उसे डॉलर के मुकाबले मजबूत माना जाता है। इसी तरह रुपये की वैल्यू बढ़ने पर उसे डॉलर के मुकाबले कमजोर माना जाता है। एक्सपर्ट्स ने कहा है कि आने वाले समय में डॉलर के मुकाबले रुपया 81.10 से 81.30 की रेंज में रह सकता है।

एक्सपर्ट्स क्या बता रहे हैं?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में ग्लोबल रिस्क के साथ ही गोल्ड और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का असर रुपये पर पड़ेगा। बढ़ते व्यापार घाटा और RBI के हस्तक्षेप का असर भी रुपये पर दिख सकता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा, "RBI के हाल में इंटरेस्ट रेट वृद्धि पर ब्रेक लगाने का अच्छा असर रुपये पर पड़ा है। हालांकि, गोल्ड और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का असर रुपये में मजबूती के रुख पर पड़ सकता है।"


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2022 में रुपये की चाल व्यवस्थित रही

कुशक कैपिटल मैनेजमेंट के फाउंडर और फंड मैनेजर विक्रांत शर्मा ने कहा कि आने वाले दिनों में रुपये का दायरा बड़ा रहेगा, क्योंकि घरेलू मार्केट में पॉजिटिव संकेतों का फायदा ग्लोबलम इकोनॉमी में रिसेशन के डर की वजह से नहीं मिल पा रहा है। RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 6 अप्रैल को मॉनेटरी पॉलिसी में कहा था कि कैलेंडर ईयर 2022 में रुपये की चाल व्यवस्थित रही है। उन्होंने कहा था कि 2023 में ही रुपये में ऐसा रुख देखने को मिल सकता है।

रुपये पर इकोनॉमी की सेहत का असर

दास ने कहा कि रुपये की चाल पर इंडियन इकोनॉमी की मजबूत बुनियादी स्थिति का असर पड़ा है। हालांकि, हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं। हमारा मानना है कि इंडियन करेंसी में स्थिरता बनी रहेगी। उधर, डीलर्स का कहना है कि फोकस फॉरेन इनफ्लो पर बना हुआ है। इसका असर आने वाले समय में रुपये पर सबसे ज्यादा रहेगा। NSDL के डेटा के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शेयरों में 1.07 अरब डॉलर का निवेश किया है। इसके बावजूद इस कैलेंडर साल में उनकी शुद्ध बिकवाली 2.13 अरब डॉलर है।

फॉरेक्स डीलर्स को मजबूती जारी रहने की उम्मीद

फॉरेक्स डीलर्स का कहना है कि रुपये की संभावित रेंज 81.10 से 81.30 हो सकती है। 17 अप्रैल को रुपये का लेवल 81.94 था। RBI की अप्रैल की मॉनेटरी पॉलिसी पेश होने के बाद से रुपये में 0.5 फीसदी मजबूती आ चुकी है। डीलर्स का मानना है कि इसमें थोड़ी और मजबूती दिख सकती है। मॉनेटरी पॉलिसी से पहले रुपये में 82.33 डॉलर पर कारोबार हो रहा था।

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