डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसला रुपया, 77.85 के स्तर पर हुआ बंद

डॉलर के मुकाबले रुपया आज रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 11 पैसे गिरकर 77.85 के स्तर पर बंद हुआ है

अपडेटेड Jun 10, 2022 पर 4:43 PM
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डॉलर की व्यापक मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय रुपया आज रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसलता नजर आया।

Rupee Closing- डॉलर के मुकाबले रुपया आज रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 11 पैसे गिरकर 77.85  के स्तर पर बंद हुआ है। वहीं कल यानी गुरुवार के कारोबार में रुपया इंट्राडे में 77.81 का स्तर छुता नजर आया था। हालांकि बाद में रुपए ने अच्छी रिकवरी दिखाई और अंत में रुपए ने 4 पैसे कमजोर होकर 77.77 पर क्लोजिंग दी थी।

Rupee Open- डॉलर की व्यापक मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय रुपया आज एक बार फिर रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसलता नजर आया। आज के शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे कमजोर होकर 77.82 के स्तर पर जाता नजर आया। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपया आज 2 पैसे कमजोर 77.79 के स्तर पर खुला था।

वहीं कल यानी गुरुवार के कारोबार में रुपया इंट्राडे में 77.81 का स्तर छुता नजर आया था। हालांकि बाद में रुपए ने अच्छी रिकवरी दिखाई और अंत में रुपए ने 4 पैसे कमजोर होकर 77.77 पर क्लोजिंग दी थी।


बता दें कि घरेलू इक्विटी बाजार की कमजोरी, क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी पैसे की लगातार निकासी रुपये पर दबाव बना रही है।

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इधर दशक में पहली बार ब्याज बढ़ाने के ECB के संकेत दिए है। ECB ने ग्रोथ का अनुमान 3.7% से घटाकर 2.8% किया है। ECB ने मार्च महंगाई अनुमान बढ़ाकर 6.8% किया है। ब्रेंट का भाव $122 के करीब बरकरार है। US नेचुरल गैस का भाव फिर $9 पर पहुंचा है।

इक्विटी बाजार की चाल पर नजर डालें तो खराब ग्लोबल संकेतों से बाजार का मूड बिगड़ा है। निफ्टी करीब 200 अंक गिरकर 16 हजार 300 के नीचे आया है। टेक और बैंकिंग-फाइनेंस शेयर बाजार में दबाव बना रहे हैं। निफ्टी बैंक 450 अंक टूटा है। मिडकैप में भी कमजोरी देखने को मिल रही है।

कमजोर होते रुपये से पड़ने वाले प्रभावों

बतातें चलें कि कमजोर रुपए से आयात महंगा होगा और पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी होगी। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी से खाने के तेलों के भाव में और इजाफा होगा। रुपए में कमजोरी से विदेशो में पढ़ाई महंगी होगी। साथ ही इंपोर्टेड लैपटॉप, फोन, दूसरे सामान पर भी इसकी मार पड़ेगी।

वहीं दूसरी तरफ कमजोर रुपये से निर्यातकों को फायदा होगा। डॉलर में मजबूती से IT इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा। साथ ही फार्मा कंपनियों को एक्सपोर्ट पर फायदा होगा। विदेशी सैलानी की संख्या में इजाफा संभव है। मजबूत डॉलर से Remittance पर ज्यादा रिटर्न संभव है।

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