100 डॉलर के पार जाएगा क्रूड? S&P ग्लोबल की बड़ी चेतावनी, बन सकता है इतिहास का सबसे बड़ा संकट

Iran-US-Israel War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग के बीच क्रूड ऑयल की सप्लाई बड़ा खतरा मंडरा रहा है। S&P ग्लोबल एनर्जी ने 2 मार्च को जारी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अगर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से तेल की सप्लाई बाधित होती है या पूरी तरह रुक जाती है, तो यह इतिहास में तेल सप्लाई का सबसे बड़ा संकट बन सकता है

अपडेटेड Mar 03, 2026 पर 11:52 AM
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Iran-US-Israel War: रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से केवल पांच ऑयल टैंकर गुजरे

Iran-US-Israel War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग के बीच क्रूड ऑयल की सप्लाई बड़ा खतरा मंडरा रहा है। S&P ग्लोबल एनर्जी ने 2 मार्च को जारी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अगर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से तेल की सप्लाई बाधित होती है या पूरी तरह रुक जाती है, तो यह इतिहास में तेल सप्लाई का सबसे बड़ा संकट बन सकता है।

इस रिपोर्ट को जिम बर्कहार्ड ने तैयार किया है। इसमें कहा गया है कि 1 मार्च को इस समुद्री मार्ग से केवल पांच ऑयल टैंकर गुजरे, जबकि हाल के दिनों में यह औसत प्रतिदिन करीब 60 टैंकरों का रहा है। आंकड़े ‘कमोडिटीड एट सी’ के हवाले से दिए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर टैंकरों की आवाजाही में यह कमी एक सप्ताह तक जारी रहती है, तो यह एक ऐतिहासिक घटना होगी। अगर यह स्थिति इससे ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। ऐसी स्थिति में सीमित सप्लाई को के चलते कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं, जिसका असर शेयर बाजारों पर भी पड़ेगा।


ग्लोबल सप्लाई पर बड़ा दांव

साल के पहले दो महीनों में हर दिन करीब 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी समुद्री मार्ग से भेजे गए। इनमें से 82 प्रतिशत एशियाई बाजारों में गए। इसके अलावा, पूरी दुनिया का LNG सप्लाई का करीब 18 प्रतिशत हिस्सा भी इसी मार्ग से गुजरता है।

S&P ग्लोबल एनर्जी के मुताबिक, अगर इस एनर्जी सप्लाई का बड़ा हिस्सा बाधित होता है, तो इससे फाइनेंशियल और आर्थिक झटके लग सकते हैं। अगर टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह रुक जाती है, तो प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल और उत्पादों की सप्लाई खतरे में पड़ सकती है। वास्तविक नुकसान इस बात पर निर्भर करेगा कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के वे पाइपलाइन मार्ग कितनी क्षमता से काम करते हैं, जो इस समुद्री रास्ते को बाईपास करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर सप्लाई जोखिम के बीच में 70 से 80 बैरल प्रतिदिन की भी कमी आती है, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध या 1990 के खाड़ी युद्ध के शुरुआती चरण से भी बड़ा झटका होगा।

100 डॉलर के पार जा सकता है कच्चा तेल

S&P ग्लोबल एनर्जी को उम्मीद है कि शॉर्ट-टर्म में तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। बाजार की सुर्खियों, अफवाहों और घबराहट या इमरजेंसी खरीदारी के दबाव पर कीमतों में तेज रिएक्शन दिखेगा।

एजेंसी की हालिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर के मध्य स्तर पर रह सकती हैं, जो एक टाइट मार्केट और "फीयर प्रीमियम" की संभावना को दिखाता है। यह स्थिति तब होगी जब होर्मुज जलडमरूमध्य से आंशिक सप्लाई बहाल हो जाती है।

हालांकि, अगर कई महीनों तक 70 लाख बैरल प्रतिदिन या उससे ज्यादा की सप्लाई बाधित रहती है, तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी ऊपर जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में सप्लाई को संतुलित करने के लिए कीमतें बढ़ाई जाएंगी और मांग में गिरावट देखी जा सकती है।

फाइनेंशियल मार्केट्स पर असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन बाजारों में तेल और गैस का भंडार कम है, वे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं, केंद्रीय बैंकों की नीति पर दबाव डाल सकती हैं और ग्लोबल शेयर बाजारों में अस्थिरता ला सकती हैं।

कुल मिलाकर, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बना रहता है, तो यह न केवल एनर्जी मार्केट, बल्कि पूरी ग्लोबल इकोनॉमी के लिए भी गंभीर संकट का कारण बन सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या सप्लाई जल्द सामान्य होती है या कच्चे तेल की कीमतें वाकई 100 डॉलर के पार निकलती हैं।

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