ITC की ग्रोथ और लंबी अवधि में इसके स्टॉक्स के रिटर्न को लेकर एनालिस्ट में नई बहस शुरू हो गई है। कई एनालिस्ट्स का कहना है कि पिछले दो साल में यह स्टॉक 100 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। ऐसे इसके अच्छे दिन बीते चुके हैं क्योंकि कंपनी की ग्रोथ और प्रॉफिट बनाने की क्षमता सुस्त पड़ रही है। हेलियस कैपिटल के फाउंडर और फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने मनीकंट्रोल की दिवाली पार्टी में बताया कि आईटीसी में उनका काफी ज्यादा निवेश है। उन्होंने कहा कि वे शेयरों को बेचने के लिए आईटीसी के खराब प्रदर्शन का इंतजार कर रहे हैं। स्टैलियन एसेट मैनेजमेंट के फाउंडर अमित जेसवानी ने भी आईटीसी की ग्रोथ की संभावनाओं पर सवाल उठाए। सितंबर तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में ज्यादा ग्रोथ नहीं दिखी।
दूसरी तिमा्ही में सुस्त पड़ी रफ्तार
जेसवानी ने कहा कि दूसरी तिमाही में आईटीसी की रेवेन्यू सिर्फ दो फीसदी बढ़ा। यह इंडिया की 14 फीसदी नॉमिनल जीडीपी ग्रोत के मुकाबले बहुत कम है। अगर किसी कंपनी की ग्रोथ इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ से कम रहती है तो मैं उसे अच्छा नहीं मानता हूं। उन्होंने कहा कि अगले तीन से छह साल में आईटीसी का प्रॉफिट दोगुना होने की उम्मीद नहीं है। इस वजह से इसके शेयरों को लेकर मेरी राय बेयरिश है। कई ऐसी चीजे हैं, जिनके चलते एनालिस्ट्स की राय आईटीसी को लेकर बेयरिश होती दिख रही है।
सिगरेट बिजनेस का कमजोर प्रदर्शन
आईटीसी का इंडिया के सिगरेट मार्केट पर कब्जा रहा है। अभी सिगरेट मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 73 फीसदी है। दूसरी तिमाही में कंपनी के सिगरेट बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ पिछली 10 तिमाहियों में सबसे कम रही है। यह सिर्फ 4 फीसदी रही। इस बिजनेस का कंपनी के रेवेन्यू में सबसे ज्यादा रोल रहता है। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इस बिजनेस की ग्रोथ 25 फीसदी थी। उसके बाद से उसमें गिरावट दिखी है। इसका असर सिगरेट बिजनेस की EBIT ग्रोथ पर भी पड़ा है। यह दूसरी तिमाही में सिर्फ 8 फीसदी बढ़ा है।
प्रेशर जारी रहने का अनुमान
Emkay Global के एनालिस्ट्स का मानना है कि आगे सिगरेट बिजनेस पर मार्जिन प्रेशर बना रह सकता है। इसकी वजह तंबाकू की पतियों की बढ़ती कीमतें हैं। इसलिए ब्रोकरेज फर्म ने सिगरेट से कमाई के अनुमान को एक फीसदी घटा दिया है। उसने आईटीसी के शेयर का टारगेट प्राइस भी 535 रुपये से बढ़ाकर 525 रुपये कर दिया है।
एफएमसीजी बिजनेस की भी तस्वीर अच्छी नहीं
आईटीसी के एफएमसीजी बिजनेस की तस्वीर भी अच्छी नहीं दिख रही। पिछली कई तिमाहियों से इस बिजनेस का प्रदर्शन अच्छा बना हुआ था। लेकिन, दूसरी तिमाही में इसमें नरमी देखने को मिली है। सितंबर तिमाही में इस सेगमेंट की बिक्री 10 फीसदी से कम रही है। यह छह तिमाहियों में सबसे कम है। इसकी वजह यह है कि कंपनी को दूसरे प्लेयर्स के साथ लोकल प्लेयर्स से चैलेंज मिल रहा है। बिस्कुट, स्नैक्स और सोप ब्रांड्स पर इसका असर पड़ा है।