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SEBI शॉर्ट सेलिंग के नियमों की समीक्षा करेगा, चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने दी जानकारी

SLB के सिस्टम के तहत इनवेस्टर्स या इंस्टीट्यूशंस अपने डीमैट अकाउंट में रखे शेयरों को दूसरे मार्केट पार्टिसिपेंट्स को उधार दे सकते हैं। इसके बदले में उन्हे फीस मिलती है। यह ट्रांजेक्शन स्टॉक एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म के जरिए होता है। क्लियरिंग कॉर्पोरेशन सेटलमेंट की काउंटर गारंटी देता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 07, 2025 पर 2:53 PM
SEBI शॉर्ट सेलिंग के नियमों की समीक्षा करेगा, चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने दी जानकारी
शॉर्ट सेलिंग के नियम 2007 में आए थे, जबकि एसएलबी के 2008 में आए थे।

सेबी शॉर्ट सेलिंग और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी) फ्रेमवर्क की समीक्षा करेगा। इन दोनों से जुड़े नियम करीब दो दशक पहले बनाए गए थे। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने यह जानकारी दी। सीएनबीसी-टीवी18 के ग्लोबल लीडरशिप समिट 2025 में पांडेय ने कहा कि शॉर्ट सेलिंग के नियम 2007 में आए थे, जबकि एसएलबी के 2008 में आए थे। तब से इन दोनों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है।

शॉर्ट सेलिंग के नियम 2007 में आए थे

Tuhin Kanta Pandey ने कहा, "2007 में आए शॉर्ट सेलिंग के फ्रेमवर्क में तो कोई बदलाव नहीं आया है। एसएलबी का फ्रेमवर्क 2008 में आया था। इनमें कुछ बार बदलाव हुए हैं। लेकिन, यह सेगमेंट दूसरे सेगमेंट की तरह विकसित नहीं हुआ है। हम जल्द एक वर्किंग ग्रुप बनाने वाले हैं, जो शॉर्ट सेलिंग और एसएलबी फ्रेमवर्क पर व्यापक विचार करेगा।"

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