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SEBI ने मार्केट मेकर्स के लिए आसान किए रिपोर्टिंग नियम, कहा- इससे पांच साल में 200 करोड़ रुपये की बचत होगी

SEBI की पहल से ब्रोकर, DP और CM के लिए स्टैंडर्डाइज्ड रिपोर्टिंग और रिपोर्टिंग फॉर्मेट में 90 फीसदी से अधिक की कमी होगी। इससे कारोबार आसान होने और कामकाज के तरीकों में सुधार की उम्मीद है। ऑपरेशनल खर्च कम होने के कारण अगले पांच वर्षों में मार्केट इकोसिस्टम में 200 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित बचत होगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 26, 2024 पर 8:36 PM
SEBI ने मार्केट मेकर्स के लिए आसान किए रिपोर्टिंग नियम, कहा- इससे पांच साल में 200 करोड़ रुपये की बचत होगी
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कारोबार को आसान बनाने के लिए यूनिफाइड डिस्टिल्ड फाइलिंग फॉर्मेट (UDiFF) शुरू किया है।

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कारोबार को आसान बनाने के लिए यूनिफाइड डिस्टिल्ड फाइलिंग फॉर्मेट (UDiFF) शुरू किया है। सेबी ने आज गुरुवार को कहा कि यह कदम स्टैंडर्डाइज्ड रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है और इस पहल से अगले पांच वर्षों में 200 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है। सेबी ने आज 26 सितंबर को जारी प्रेस रिलीज में कहा कि इससे ट्रेडिंग मेंबर्स, क्लियरिंग मेंबर्स और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स जैसे मार्केट मेकर्स की रिपोर्टिंग जरूरतों में 90 फीसदी की कमी आएगी और फिनटेक के लिए एंट्री की लागत कम होगी। बता दें कि UDiFF कई रेगुलेटरी डॉक्यूमेंट्स की फाइलिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सेबी की एक पहल है।

अगले पांच वर्षों में 200 करोड़ रुपये से अधिक की होगी बचत

सेबी ने प्रेस रिलीज में इस रिपोर्टिंग सिस्टम से होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से बताया है। मार्केट रेगुलेटर को उम्मीद है कि यह ट्रेडिंग मेंबर्स (TM), क्लियरिंग मेंबर्स (CM) और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स (DPs) को लाभ प्रदान करती रहेगी। बयान में कहा गया है कि UDiFF को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। रिपोर्टिंग में भारी कमी के चलते अनुमान है कि ऑपरेशनल खर्च कम होने से सदस्यों को अगले पांच वर्षों में 200 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी।

TM, CM और DP को कई ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया के लिए हर दिन स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी जैसी रिपोर्ट्स मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन (MII) के पास फाइल करनी होती है। पहले मेंबर्स द्वारा हर दिन 200 फॉर्मेट दाखिल किए जाते थे। नए रिपोर्टिंग फॉर्मेट के साथ यह संख्या घटकर प्रतिदिन 23 हो गई है। आइए जानते हैं, सेबी की इस पहल से और कौन-कौन से लाभ होंगे।

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