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SME IPO की जांच में कई गड़बड़ियां मिलने पर SEBI ने निवेशकों को किया सतर्क

रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी एसएमई आईपीओ में तेजी से बढ़ी है। सेबी का मानना है कि एसएमई आईपीओ में निवेश काफी रिस्की है। ऐसे आईपीओ में पीई फंडों का निवेश काफी कम होता है। उधर, एसएमई के कामकाज पर प्रमोटर्स का असर काफी ज्यादा होता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 20, 2024 पर 1:53 PM
SME IPO की जांच में कई गड़बड़ियां मिलने पर SEBI ने निवेशकों को किया सतर्क
लिस्टेड एसएमई आम तौर फैमिली बिजनेस होते हैं। इनमें प्रमोटर्स की बड़ी भूमिका होती है।

एसएमई आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। सेबी ने इस बारे में सतर्क किया है। मार्केट रेगुलेटर के डिस्कशन पेपर में कहा गया है कि एलॉटेड इनवेस्टर्स और अप्लिकेंट्स का रेशियो FY24 में 245 गुना बढ़ा है। यह FY22 में सिर्फ 4 गुना था। सेबी की चिंता की वजह यह है कि एसएमई इश्यू में प्राइवेट इक्विटी इनवेस्टर्स का ज्यादा निवेश नहीं होता है। पीई इनवेस्टर्स की मौजूदगी से कंपनी में प्रमोटर्स की जरूरत से ज्यादा दखलंदाजी में कमी देखने को मिलती है।

रेवेन्यू बढ़ाने के लिए सर्कुलर ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल

लिस्टेड एसएमई आम तौर फैमिली बिजनेस होते हैं। इनमें प्रमोटर्स की बड़ी भूमिका होती है। सेबी ने ऐसे मामले भी पाए हैं, जिनमें रिलेटेड पार्टीज या शेल कंपनियों के साथ सर्कुलर ट्रांजेक्शन के जरिए रेवेन्यू बढ़ाया गया। कुछ कंपनियों को आईपीओ से जुटाए गए पैसे का दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल करते हुए भी पाया गया है। इसके बाद सेबी ने एसएमई आईपीओ की मॉनिटरिंग बढ़ाई है। कुछ एसएमई ने आईपीओ या राइट्स इश्यू से जुटाए गए पैसा शेल कंपनियों को उपलब्ध कराया, जिन पर प्रमोटर्स का नियंत्रण था।

कई एसएमई के खिलाफ मार्केट रेगुलेटर की कार्रवाई

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