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सेबी ने आईपीओ से संबंधित नियमों में किए बड़े बदलाव, जानिए रिटेल निवेशकों को क्या होगा फायदा

साल 2021 में अब कुछ ही दिन बाकी है ऐसे में सेबी ने आज आईपीओ मार्केट से संबंधित कुछ खामियों को दूर करने के उद्देश्य से नए नियम जारी किए हैं।

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 28, 2021 पर 5:16 PM
सेबी ने आईपीओ से संबंधित नियमों में किए बड़े बदलाव, जानिए रिटेल निवेशकों को क्या होगा फायदा
सेबी ने आईपीओ के प्राइस बैंड से संबंधित नियमों में भी बदलाव किए हैं। अब से फ्लोर प्राइस और अपर प्राइस के बीच का अंतर कम से कम 105 फीसदी होगा।

बुल मार्केट के पीक पर जब प्राइमरी मार्केट में जोरदार गहमागहमी नजर आ रही है। उस समय प्राइमरी मार्केट के नियमों में हमें कई ऐसी खामियां नजर में आईं जो खासकर न्यू एज की टेक्नोलॉजी और इंटरनेट आधारित कंपनियों की लिस्टिंग से जुड़ी हुई है।

साल 2021 में अब कुछ ही दिन बाकी है ऐसे में सेबी ने आज आईपीओ मार्केट से संबंधित कुछ खामियों को दूर करने के उद्देश्य से नए नियम जारी किए हैं। ये नियम आईपीओ के प्राइस बैंड, एंकर इन्वेस्टरों के लॉक-इन पीरियड और लिस्टिंग के दिन किसी मैज्योरिटी शेयर होल्डर द्वारा बेची जा सकने वाली हिस्सेदारी से संबंधित हैं । ये बदलाव 16 नवंबर के डिस्कशन पेपर पर आधारित हैं।

सेबी ने नियमों में यह बदलाव शेयरों की लिस्टिंग के दिन या जब एंकर निवेशक अपने होल्डिंग को बेचते हैं उस दिन स्टॉक प्राइस में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए किया है। वर्तमान में किसी ऑफर फॉर सेल के दौरान शेयर होल्डर अपनी आंशिक या पूरी हिस्सेदारी बेच सकता है लेकिन नई एज की कंपनियों के मामले में जिनके प्रमोटरों को पहचानना आसान नहीं है और जो लगातार घाटे में है, ये नियम उचित नहीं लगता।

किसी बड़े शेयर होल्डर के कंपनी से पूरी तरह से निकल जाने पर निवेशकों में कंपनी को लेकर विश्वास नहीं बनता। इस कमी को सुधारने के लिए सेबी ने अब नया नियम यह बनाया है कि ऐसा शेयर होल्डर जिसके पास 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है वह लिस्टिंग के दिन अपनी पूरी हिस्सेदारी नहीं बेच पाएगा । ऐसा शेयर होल्डर लिस्टिंग के दिन सिर्फ 50 फीसदी हिस्सेदारी बेच पाएगा।

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